दिसंबर आते ही ठंड बढ़ जाती है और घरों में गीज़र और रूम हीटर का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ जाता है। लोग अक्सर इन्हें लंबे समय तक चलाते रहते हैं, खासकर सुबह और शाम के समय। यही कारण है कि सर्दियों के महीनों में बिजली का बिल अचानक बढ़ जाता है। असली समस्या इन उपकरणों के इस्तेमाल में नहीं, बल्कि इनके गलत इस्तेमाल में है।
स्मार्ट टाइमर से बिजली नियंत्रण
आजकल बाज़ार में टाइमर और ऑटो कट-ऑफ सुविधाओं वाले आधुनिक गीज़र और हीटर उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं से आप एक निश्चित समय के बाद उपकरण को स्वचालित रूप से बंद कर सकते हैं। कई स्मार्ट मॉडल मोबाइल ऐप के ज़रिए भी नियंत्रित किए जा सकते हैं, जिससे ज़रूरत न होने पर उपकरण को बंद करना आसान हो जाता है। इससे अनावश्यक बिजली की खपत रुकती है और बिल नियंत्रण में रहता है।
थर्मोस्टेट का सही इस्तेमाल क्यों ज़रूरी है
अधिकांश गीज़रों में बिल्ट-इन थर्मोस्टेट होता है, लेकिन कई लोगों को सही तापमान सेटिंग की जानकारी नहीं होती। गीज़र के लिए 50 से 55 डिग्री सेल्सियस का तापमान पर्याप्त माना जाता है। इससे अधिक तापमान पर पानी ज़रूरत से ज़्यादा गर्म हो जाता है, जिससे बिजली की खपत तेज़ी से बढ़ जाती है। गीज़र को सही तापमान पर चलाने से आराम मिलता है और बिजली की बचत भी होती है।
नया गीज़र या हीटर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें
यदि आप नया गीज़र या रूम हीटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल कीमत ही न देखें, बल्कि इसकी BEE स्टार रेटिंग भी जांचें। उच्च स्टार रेटिंग वाले उपकरण शुरू में थोड़े महंगे हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में वे कम बिजली की खपत करके आपके पैसे बचाते हैं। कम स्टार रेटिंग वाले उपकरण सस्ते लग सकते हैं, लेकिन वे अधिक बिजली की खपत करते हैं।
अपनी उपयोग की आदतों में बदलाव लाएं
रूम हीटर का इस्तेमाल करते समय, कमरे के दरवाज़े और खिड़कियाँ बंद रखना बेहद ज़रूरी है ताकि गर्म हवा बाहर न निकल जाए। इसी तरह, गीज़र को घंटों तक चालू छोड़ने की आदत से बचना चाहिए। ज़रूरत पड़ने पर ही इसका इस्तेमाल करना और इस्तेमाल के तुरंत बाद इसे बंद कर देना बिजली बचाने का सबसे आसान तरीका है। ये छोटी-छोटी सावधानियाँ आपको सर्दियों में भारी बिजली बिल से बचा सकती हैं।