नेहा कक्कड़ को अपने नए गाने “लॉलीपॉप” को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। फैंस भड़क उठे और बोले – शर्म करो!

Saroj kanwar
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नेहा कक्कड़ के नए गाने से बवाल मच गया – सोशल मीडिया सेंसेशन और बॉलीवुड गायिका नेहा कक्कड़ इन दिनों अपने नए गाने “कैंडी शॉप” को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह तारीफ नहीं, बल्कि जमकर ट्रोलिंग है। गाना कुछ ही दिन पहले रिलीज़ हुआ है और इसने पहले ही विवाद खड़ा कर दिया है। मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने गाने का विरोध करते हुए सीधे सोनी टीवी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।

मामला है आखिर?
नेहा कक्कड़ का गाना “कैंडी शॉप” रिलीज़ होते ही लोगों ने इसकी कोरियोग्राफी और “अजीब” बोलों की आलोचना शुरू कर दी। विवाद तब और बढ़ गया जब मालिनी अवस्थी ने “मूवी रिव्यू” नाम के एक पेज की पोस्ट को रीट्वीट किया।
फिल्म समीक्षा पोस्ट में लिखा था:
“जब आपकी चमक फीकी पड़ने लगती है, तो आप ऐसे बनावटी हुकस्टेप्स और घटिया बोलों का सहारा लेते हैं। गाने की शैली किसी सस्ते के-पॉप की नकल जैसी लगती है। यह सब बेहद शर्मनाक और भद्दा है।”

मालिनी अवस्थी का तीखा हमला: “सोनी टीवी, जवाब दो”
मालिनी अवस्थी ने न सिर्फ गाने की आलोचना की, बल्कि इंडियन आइडल में जज के तौर पर नेहा कक्कड़ की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा: “सोनी टीवी को जवाब देना चाहिए कि नेहा कक्कड़ इतने सालों से इंडियन आइडल में जज क्यों हैं? आप अपने चैनल पर मासूम प्रतिभाओं को अवसर देते हैं, और एक रियलिटी शो जज उन बच्चों के लिए रोल मॉडल होती है। नेहा कक्कड़ का यह ‘बेवकूफी भरा’ काम बिलकुल अस्वीकार्य है।”
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
नेहा के नए अवतार को लेकर फैंस की राय बंटी हुई है, लेकिन गुस्सा साफ तौर पर दिख रहा है। कुछ टिप्पणियां इस प्रकार हैं:

एक यूजर ने लिखा: “कला के नाम पर सब कुछ परोसा जा रहा है। नेहा जैसी सम्मानित गायिका से ऐसी अश्लीलता की उम्मीद नहीं थी।” “जो लड़की कभी जाग्रतियों में गाती थी, अब प्रतियोगिता के चक्कर में इस कदर बदनाम हो गई है।” यह गाना करीब 15 दिसंबर को रिलीज हुआ था और इस लेख को लिखे जाने तक इसे 20 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।

विवाद का कारण: लोगों को नेहा का बोल्ड अंदाज और गाने में पश्चिमी के-पॉप स्टाइल की नकल पसंद नहीं आ रही है। मालिनी हमेशा से भारतीय संस्कृति और संगीत की गरिमा की समर्थक रही हैं, इसलिए उन्होंने इसे “संस्कृति के खिलाफ” माना।

हमारा विचार
संगीत में प्रयोग करना अच्छी बात है, लेकिन जब बात राष्ट्रीय जज की हो, तो दर्शक थोड़ी शालीनता और मर्यादा की उम्मीद करते हैं। क्या नेहा कक्कड़ का यह गाना वाकई ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ है या सिर्फ सुर्खियों में बने रहने का एक तरीका? अपनी राय कमेंट्स में साझा करें।

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