दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने इस लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट पर नई जानकारी दी है। एक बार चालू होने के बाद, यह एक्सप्रेसवे न केवल दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम को कम करेगा, बल्कि उत्तराखंड की यात्रा को भी बहुत तेज और आसान बना देगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा निर्मित यह प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में है।
एक्सप्रेसवे कहां से गुजरेगा?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होगा। यह उत्तर प्रदेश के बागपत, बरौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर से होते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पहुंचेगा। यह मार्ग दिल्ली और उत्तराखंड के बीच एक सीधा, नियंत्रित पहुंच वाला राजमार्ग प्रदान करेगा, जिससे रास्ते में पड़ने वाले कई शहरों में ट्रैफिक जाम कम होने की उम्मीद है।
सरकार की नवीनतम जानकारी क्या है?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में परियोजना की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि 210 किलोमीटर लंबे, छह लेन वाले, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो चुका है। संशोधित समय सीमा के अनुसार, यह जनवरी 2026 तक पूरा हो जाएगा। हालांकि, अक्षरधाम से पूर्वी परिधीय एक्सप्रेसवे जंक्शन तक 70 मीटर सर्विस रोड का काम कानूनी विवाद के कारण अभी भी लंबित है।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने पहले एक्सप्रेसवे को अक्टूबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। जुलाई में संसद में भी यही समय सीमा घोषित की गई थी। हालांकि, तकनीकी और कानूनी बाधाओं के कारण परियोजना में देरी हुई। दिसंबर में जारी एक बयान में स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने अब जनवरी 2026 को नई समय सीमा के रूप में निर्धारित किया है।
गति सीमा और कनेक्टिविटी के लाभ
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की यात्रा में वर्तमान 6 से 6.5 घंटे के बजाय केवल 2.5 घंटे लगेंगे। यह एक्सप्रेसवे हरिद्वार के लिए एक अलग सड़क भी प्रदान करेगा और चारधाम राजमार्ग से जुड़ेगा, जिससे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। एक्सप्रेसवे के खुलने से न केवल यात्रियों का समय बचेगा बल्कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और आसपास की सड़कों पर यातायात जाम भी कम होगा। सरकार का दावा है कि यह परियोजना क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देगी। अब सबकी निगाहें जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब यह बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे जनता के लिए खुल सकता है।