लड़की बहन योजना: जहां राज्य सरकारें महिलाओं के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, वहीं महाराष्ट्र की लड़की बहन योजना विशेष ध्यान आकर्षित कर रही है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करना है। हालांकि, कुछ समय पहले यह खुलासा हुआ था कि कई पात्र न होने के बावजूद लोग इस योजना का लाभ उठा रहे थे। इसलिए, सरकार अब ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर रही है।
महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि लगभग 35 करोड़ रुपये की राशि लड़की बहन योजना के तहत पात्र न होने वाले लोगों को प्राप्त हुई थी, और अब यह राशि उनसे वसूल की जाएगी। विधान परिषद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 14.5 करोड़ रुपये के लाभ प्राप्त करने वालों में 1,526 सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि अधिकारियों ने 14,298 ऐसे पुरुषों की भी पहचान की है, जिन्होंने अपात्र होने के बावजूद लाभ प्राप्त किया। सरकार ने इन लाभों को अवैध रूप से प्राप्त करने वाले सभी पुरुषों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ वसूली की कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया है। विभागों को महाराष्ट्र सिविल सेवा नियमों के तहत धनराशि की वसूली के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
26 लाख से अधिक संदिग्ध खाते
इस वर्ष की शुरुआत में, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी विभाग के नेतृत्व में हुई एक जांच में 26 लाख खातों को संभावित रूप से अपात्र घोषित किया गया था। इनमें वे परिवार शामिल थे जहां एक से अधिक सदस्य लाभ प्राप्त कर रहे थे या जहां एक ही व्यक्ति अन्य योजनाओं का भी लाभ उठा रहा था। कई मामलों में, पुरुषों ने भी इस योजना के लिए आवेदन किया था, जबकि यह विशेष रूप से महिलाओं के लिए बनाई गई थी। परिणामस्वरूप, जून में ऐसे सभी खातों में भुगतान रोक दिया गया था।
किन महिलाओं को लाभ मिलता है?
लड़की बहन योजना में 21 से 65 वर्ष की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्त और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं शामिल हैं। उनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। यदि परिवार में कोई अविवाहित महिला इस योजना के लिए पात्र है, तो वह भी इसका लाभ उठा सकती है। लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से भी सहायता प्राप्त करने की अनुमति है, बशर्ते कुल मासिक सहायता राशि 1,500 रुपये से अधिक न हो।