टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी: पिछले कुछ दिनों में टमाटर की कीमतें एक बार फिर उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। कुछ हफ़्ते पहले तक हर घर की रसोई में आसानी से उपलब्ध टमाटर अब लगातार महंगे होते जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी कीमतों पर ध्यान देने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अचानक मौसम परिवर्तन और भारी बारिश ने देश भर में टमाटर की आपूर्ति बाधित कर दी है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है।
बारिश और मौसम ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया
महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश ने किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुँचाया है। परिणामस्वरूप, आज़ादपुर मंडी जैसी प्रमुख सब्ज़ी मंडियों में आने वाले टमाटर के ट्रकों की संख्या में काफी कमी आई है। ट्रकों की संख्या में इस कमी के कारण आपूर्ति में कमी आई है, जिससे खुदरा कीमतों में तेज़ी से वृद्धि हुई है।
शादियों के मौसम में माँग बढ़ने से कीमतों में तेज़ी
शादियों और त्योहारों के मौसम में टमाटर की खपत तेज़ी से बढ़ जाती है। इस बार माँग तो बढ़ी है, लेकिन आपूर्ति कम होने से कीमतों में भारी उछाल आया है। कई उपभोक्ता अब ज़रूरत से कम मात्रा में टमाटर खरीद रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में बाज़ार स्थिर हो जाएगा।
खुदरा कीमतों में तेज़ उछाल
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 19 अक्टूबर से 19 नवंबर के बीच देश भर में टमाटर का औसत खुदरा मूल्य 36 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 46 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। चंडीगढ़ में कीमतों में 112 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में मासिक वृद्धि 40 प्रतिशत से अधिक रही। कई शहरों में अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहे हैं।
माँग ने मुद्रास्फीति की चिंताएँ बढ़ाईं
हाल ही में, टमाटर, प्याज और आलू जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण खुदरा मुद्रास्फीति 0.25 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच गई थी, जो कई वर्षों का सबसे निचला स्तर है। हालाँकि, बारिश के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से मुद्रास्फीति फिर से बढ़ने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ़्तों में इसका असर उपभोक्ताओं की जेब पर साफ़ दिखाई देगा।
आने वाले दिनों में बाज़ार कैसा रहेगा?
अगर मौसम जल्द ही सामान्य नहीं हुआ, तो नियमित फ़सल आपूर्ति बहाल होने में समय लग सकता है। शादियों के मौसम में माँग ज़्यादा रहती है, इसलिए कीमतों में तुरंत गिरावट की संभावना नहीं है। सरकार स्थिति पर नज़र रख रही है और ज़रूरत पड़ने पर बाज़ार में हस्तक्षेप कर सकती है।