टोल प्लाजा से आने-जाने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है। अब, अगर किसी वाहन में फास्टैग नहीं है या तकनीकी समस्या के कारण उसे स्कैन नहीं किया जा सकता है, तो वाहन चालकों को दोगुना टोल शुल्क नहीं देना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने 16 नवंबर से ऑनलाइन टोल भुगतान की नई सुविधा लागू की है, जिससे वाहन चालक निर्धारित टोल शुल्क से केवल 25 प्रतिशत अधिक भुगतान करके अपना भुगतान पूरा कर सकते हैं। इस फैसले से राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है और टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ कम होने की संभावना बढ़ गई है।
ऑनलाइन भुगतान की शुरुआत के साथ, वाहन चालक अब गूगल पे, फोनपे और अन्य डिजिटल वॉलेट जैसे यूपीआई तरीकों का उपयोग करके तुरंत भुगतान कर सकते हैं। पहले, जब फास्टैग स्कैन नहीं होते थे, तो वाहन मालिकों को प्रत्येक टोल प्लाजा पर नकद भुगतान करने पर निर्धारित टोल राशि का दोगुना भुगतान करना पड़ता था। यह व्यवस्था लंबे समय से वाहन चालकों के लिए असुविधा का कारण बनी हुई थी, लेकिन नए नियमों ने इसमें काफी सुधार किया है।
लच्छीवाला टोल प्लाजा प्रबंधक ईश्वर पांडे ने बताया कि राजमार्ग मंत्रालय के निर्देशों के बाद 15 नवंबर की रात 12 बजे से यह सुविधा लागू कर दी गई है। अब से, नकद भुगतान करने वाले वाहन चालक ऑनलाइन भुगतान के विकल्प के रूप में अतिरिक्त शुल्क से बच सकते हैं। यह कदम राजमार्गों पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की केंद्र सरकार की नीति को दर्शाता है।
नई दरों के अनुसार, फास्टैग वाले वाहन चालक अपने पुराने किराए पर यात्रा जारी रख सकेंगे, जबकि ऑनलाइन भुगतान करने वालों को केवल 25% अतिरिक्त शुल्क देना होगा। कार, जीप और हल्के मोटर वाहनों के लिए फास्टैग शुल्क ₹105 है, जबकि ऑनलाइन भुगतान पर यह बढ़कर ₹131.25 हो जाएगा। इसी प्रकार, अन्य श्रेणियों के हल्के वाणिज्यिक वाहनों, बसों, ट्रकों, थ्री-एक्सल वाहनों, एचसीएम, ईएमई, एमएवी और बड़े वाहनों के लिए नई दरें निर्धारित की गई हैं। नकद भुगतान पर अभी भी दोगुना शुल्क लगेगा, इसलिए वाहन चालकों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
यह सरकारी पहल राजमार्ग टोल प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सरल और तेज़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल टोल शुल्क से समय की बचत होगी, विवाद कम होंगे और यात्रियों को अधिक सहज अनुभव मिलेगा।