परिवहन विभाग की विशेषता: उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने नागरिकों को सरल और त्वरित सेवा प्रदान करने के लिए व्हाट्सएप-आधारित चैटबॉट सेवा शुरू की है। यह चैटबॉट वाहन और सारथी डेटाबेस के साथ पूरी तरह से एकीकृत है, जिससे उपयोगकर्ता बिना आरटीओ कार्यालय जाए अपने मोबाइल फोन पर ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण और चालान स्थिति जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस नई सुविधा को राज्य में परिवहन सेवाओं को और अधिक डिजिटल, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आरटीओ ने शुरू की यह सुविधा
उपयोगकर्ता केवल +918005441222 पर “Hi” संदेश भेजकर इस चैटबॉट को सक्रिय कर सकते हैं। चैटबॉट तुरंत एक भाषा विकल्प के साथ उपयोगकर्ता का स्वागत करेगा और एक विस्तृत मेनू प्रदर्शित करेगा। वर्तमान में, यह चैटबॉट हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध है, जिससे राज्य के अधिकांश उपयोगकर्ताओं के लिए इसका उपयोग करना आसान हो गया है।
उपलब्ध सेवाओं के बारे में जानें
मेनू में ड्राइविंग लाइसेंस विवरण, वाहन पंजीकरण जानकारी, चालान देखना और भुगतान, वाणिज्यिक वाहन परमिट, सड़क सुरक्षा जानकारी, फेसलेस सेवाएँ और कई अन्य परिवहन सेवाओं की जानकारी दी गई है। उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार कोई भी विकल्प चुन सकते हैं, और चैटबॉट उन्हें आवश्यक निर्देशों के साथ पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन करेगा। अधिकांश जानकारी उपयोगकर्ता के मोबाइल पर पीडीएफ प्रारूप में साझा की जाती है।
यह चैटबॉट कैसे मदद करेगा?
यह चैटबॉट 24×7 उपलब्ध है, जिससे नागरिकों के लिए समय की कमी दूर हो जाती है। नागरिक कार्यालय समय के बाद या छुट्टियों में भी अपनी ज़रूरत की सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आरटीओ कार्यालय में लगने वाली लंबी कतारों और अनावश्यक झंझटों से भी छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा, यह सेवा बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर देगी, जिससे प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएगी। चैटबॉट की मदद से दस्तावेज़ अपलोड करना भी आसान हो गया है, क्योंकि उपयोगकर्ता मेनू में दिए गए निर्देशों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज़ आसानी से अपलोड कर सकते हैं।
सरकारी तंत्र डिजिटल सेवा अपना रहा है
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की यह पहल दर्शाती है कि सरकारी विभाग डिजिटल माध्यमों से नागरिक सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। अगर अन्य सरकारी विभाग भी ऐसी ही सेवाएँ शुरू करें, तो इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों के समय और संसाधनों की काफ़ी बचत होगी।