भारत सरकार का आयकर विभाग एक महत्वपूर्ण वित्तीय पहचान दस्तावेज़ के रूप में पैन कार्ड जारी करता है। कार्ड पर अंकित दस अंकों का अल्फ़ान्यूमेरिक नंबर किसी व्यक्ति या संस्था की वित्तीय गतिविधियों को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से दर्ज करने में मदद करता है। आधुनिक डिजिटल युग में, पैन कार्ड का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि यह अब केवल आयकर रिटर्न दाखिल करने तक ही सीमित नहीं रह गया है। चाहे बैंक खाता खोलना हो, क्रेडिट कार्ड प्राप्त करना हो, बड़े वित्तीय लेन-देन करना हो या निवेश प्रक्रियाएँ पूरी करनी हों, पैन कार्ड हर जगह आवश्यक है।
पैन कार्ड आर्थिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का आधार बनता जा रहा है। यह दस्तावेज़ कर चोरी पर नज़र रखने, धोखाधड़ी रोकने और लेन-देन की विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। पैन कार्ड अब नौकरीपेशा से लेकर व्यवसायियों तक, सभी के लिए एक अनिवार्य पहचान पत्र बन गया है।
सरकार ने लोगों को पैन कार्ड से जुड़े एक ज़रूरी काम के बारे में आगाह किया है, जिसे समय पर पूरा करना बेहद ज़रूरी है। यह काम है आधार और पैन कार्ड को लिंक करना। आधार-पैन लिंक न होने पर कई ज़रूरी प्रक्रियाएँ रुक सकती हैं और लोगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने आधार-पैन लिंकिंग की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2025 तय की है। इस तारीख तक ऐसा न करने पर पैन कार्ड निष्क्रिय घोषित कर दिया जाएगा। निष्क्रिय पैन कार्ड के साथ, बैंकिंग लेनदेन असंभव हो जाएगा और सामान्य वित्तीय लेनदेन भी संभव नहीं होगा। इसके अलावा, संपत्ति की खरीदारी, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और अन्य निवेश प्रक्रियाएँ भी प्रभावित होंगी।
निष्क्रिय पैन कार्ड टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकता है। इसलिए, विशेषज्ञ आखिरी समय की परेशानियों से बचने के लिए जल्द से जल्द आधार को पैन से लिंक करने की सलाह देते हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी आसानी से पूरी की जा सकती है।