नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों के लिए सरकार ने एक अहम घोषणा की है। 60 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को अब वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन करने की ज़रूरत नहीं होगी। यानी सरकार अपने आप पेंशन की राशि उनके खातों में ट्रांसफर कर देगी। राज्य में बिना फॉर्म भरे पेंशन का लाभ मिलेगा। शुक्रवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार लगभग 68 लाख बुजुर्गों को पेंशन का लाभ दे रही है। बैठक में निर्देश दिए गए कि “परिवार एक पहचान” योजना के तहत सरकार 60 साल से ज़्यादा उम्र के हर परिवार का डेटा रखेगी। इसी डेटा के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन का वितरण किया जाएगा। राज्य के लिए अन्य फ़ैसले भी लिए गए।
लाभार्थियों की पहचान कैसे होगी?
कैबिनेट बैठक के बाद, समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “एक परिवार, एक पहचान” प्रणाली के तहत, परिवार पहचान पत्र के माध्यम से लाभार्थियों की स्वतः पहचान हो जाएगी। इससे लाभार्थी की सहमति के बाद पेंशन स्वीकृत हो सकेगी।
राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। असीम अरुण ने बताया कि यह प्रणाली 60 वर्ष की आयु के करीब पहुँच रहे व्यक्तियों की डिजिटल रूप से निगरानी करेगी। इसके अलावा, एसएमएस, व्हाट्सएप या फोन कॉल के माध्यम से सहमति प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। जहाँ डिजिटल सहमति प्राप्त नहीं होगी, वहाँ अधिकारी या स्थानीय सहायक लाभार्थियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर सकेंगे।
पेंशन स्वीकृति 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
असीम अरुण ने बताया कि पेंशन स्वीकृति सहमति के 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी और भुगतान सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में जमा कर दिए जाएँगे। कैबिनेट ने दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1962 में संशोधन को भी मंजूरी दी ताकि इसे ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे राज्य में लागू किया जा सके।
श्रम मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि संशोधित ढाँचा छोटे प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना व्यापक श्रम सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। कैबिनेट ने 10 साल तक के किराये के समझौतों के लिए स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में रियायत देकर किरायेदारी नियमों को सरल बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।