टैक्स रिफंड में अब नहीं होगी देरी, CBDT ने CPC की शक्तियों का किया विस्तार

Saroj kanwar
3 Min Read

सीबीडीटी अधिसूचना: आयकर विभाग ने करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने हेतु एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 27 अक्टूबर, 2025 को एक अधिसूचना जारी कर बेंगलुरु स्थित केंद्रीकृत प्रसंस्करण केंद्र (सीपीसी) के अधिकारों का विस्तार किया है। सीपीसी अब करदाताओं के रिटर्न में पाई जाने वाली गणना संबंधी या लेखा संबंधी त्रुटियों को स्वचालित रूप से ठीक कर सकेगा।

रिफंड में देरी की समस्या खत्म होगी

पहले, करदाताओं को विलंबित रिफंड, गलत टैक्स क्रेडिट या मूल्यांकन त्रुटियों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए कई अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता था। अब, सीपीसी के पास इन त्रुटियों को स्वचालित रूप से ठीक करने का अधिकार है, जिसके लिए पहले संबंधित मूल्यांकन अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता होती थी। इससे कर रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड जारी करने में काफी तेजी आएगी।

सीपीसी को नई शक्तियाँ प्रदान की गईं

नई अधिसूचना के अनुसार, सीपीसी अब केवल प्रसंस्करण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसे मूल्यांकन और सुधार से संबंधित शक्तियाँ भी प्रदान की गई हैं। इसका अर्थ है कि यदि किसी कर रिटर्न या रिफंड गणना में कोई त्रुटि पाई जाती है, तो सीपीसी उसे स्वतः ही ठीक कर सकेगा। इसके अतिरिक्त, अतिरिक्त, संयुक्त और अधीनस्थ कर निर्धारण अधिकारियों की शक्तियों का भी विस्तार किया गया है, जिससे विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों का शीघ्र समाधान संभव हो सकेगा।

अब सुधार के लिए प्रतीक्षा नहीं

करदाताओं को अब अपने रिफंड या ब्याज गणना में त्रुटियों को ठीक करने के लिए कई स्तरों पर आवेदन नहीं करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि धारा 244ए के तहत रिफंड निर्धारण या ब्याज गणना में त्रुटियों को अब तुरंत ठीक किया जा सकेगा। इससे रिफंड समय पर जारी करना सुनिश्चित होगा और करदाताओं को राहत मिलेगी।
इस कदम से समय की बचत होगी

सीबीडीटी के इस कदम से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रणाली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अब, हर सुधार और समायोजन सीपीसी प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे मैन्युअल त्रुटियों की संभावना कम होगी और कर प्रशासन में जवाबदेही बढ़ेगी। यह फेसलेस और तकनीक-आधारित कर प्रशासन को भी मज़बूत करेगा।

करदाताओं को प्रत्यक्ष लाभ

इस बदलाव से करदाताओं को कई लाभ होंगे। उन्हें छोटी-छोटी त्रुटियों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उन्हें समय पर रिफंड मिलेगा। इसके अतिरिक्त, डेटा की सटीकता बढ़ेगी और कर रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम कर प्रणाली को अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *