हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गई “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” योजना राज्य के किसानों के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। अब तक 12 लाख किसान इस पोर्टल से जुड़ चुके हैं, जबकि राज्य में लगभग 15.5 लाख किसान परिवार हैं। यह योजना किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी सभी सरकारी सेवाएँ और जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराती है।
किसानों की बढ़ती भागीदारी
मार्च से अब तक लगभग 6,50,000 नए किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं। किसानों की यह बढ़ती संख्या इस योजना में उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। इस पोर्टल के माध्यम से किसान अपनी फसल की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करते हैं, जिससे सरकारी दरों पर अपनी उपज बेचना आसान हो जाता है। सरकार पंजीकृत किसानों को बारी-बारी से एसएमएस भेजकर उन्हें नियत समय पर मंडी में बुलाती है। इससे न केवल भीड़ कम होती है, बल्कि पारदर्शिता भी बनी रहती है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान यह प्रणाली किसानों के लिए बेहद कारगर साबित हुई।
किसानों को प्रमुख लाभ
यह पोर्टल किसानों के लिए वन-स्टॉप समाधान के रूप में कार्य करता है। इसके माध्यम से किसानों को कृषि से संबंधित सभी सरकारी योजनाओं की समय पर जानकारी और लाभ प्राप्त होता है। इस पोर्टल से जुड़कर, किसानों को खाद, बीज, ऋण और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी सीधे उनके खातों में प्राप्त होती है। उन्हें बुवाई और कटाई के समय, बाज़ार की जानकारी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता भी मिलती है।
इसके अलावा, पराली न जलाने वाले किसानों को भी इस पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। तभी वे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित वित्तीय सहायता के पात्र होंगे।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 5 जुलाई, 2019 को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल लॉन्च किया। इस योजना का उद्देश्य राज्य के सभी किसानों को एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना और कृषि से संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उन तक पहुँचाना है। यह पोर्टल पूरी तरह से भूमि अभिलेखों से जुड़ा है, जिससे किसानों की सटीक पहचान और फसलों का सटीक विवरण सुनिश्चित होता है।
किसान अपनी ज़मीन पर बोई गई फसलों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करते हैं और इसी डेटा के आधार पर उनकी फसलों की सरकारी खरीद तय होती है। इस पारदर्शी प्रक्रिया से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है और किसानों को उनका हक सीधे मिलता है।
पोर्टल पर पंजीकरण कैसे करें
पोर्टल पर पंजीकरण के लिए किसानों को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है। पंजीकरण के दौरान फसल संबंधी अपडेट मोबाइल नंबर पर भेजे जाते हैं। इसके अतिरिक्त, भूमि संबंधी जानकारी के लिए, किसान को राजस्व रिकॉर्ड या खसरा संख्या देखकर सही जानकारी दर्ज करनी होगी। किसान को पोर्टल पर फसल का नाम, किस्म और बुवाई का समय भी दर्ज करना होगा।
पंजीकरण के दौरान बैंक पासबुक की एक प्रति आवश्यक है ताकि किसी भी योजना का धन सीधे किसान के बैंक खाते में स्थानांतरित किया जा सके। इससे सरकारी सब्सिडी और सहायता राशि का वितरण पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी हो जाता है।