एसबीआई, पीएनबी, बीओबी, केनरा – पीएसबी विलय के बाद कौन से बैंक अस्तित्व में नहीं रहेंगे?

Saroj kanwar
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SBI, PNB, BOI: आने वाले दिनों में बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव होने की उम्मीद है। मोदी सरकार एक बार फिर बड़े बैंक विलय की तैयारी में है। नीति आयोग की सिफ़ारिश के बाद, सरकार छोटे सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों में विलय करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार की विलय योजना में चार सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़ी इकाइयाँ बनाना शामिल हो सकता है। इस बड़े विलय के तहत, सरकार इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ इंडिया और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र का विलय कर सकती है। इस योजना के तहत, सरकार दो केंद्रीय सरकारी बैंकों का विलय करने की तैयारी कर रही है, जिससे देश में केवल चार बड़े सरकारी बैंक बचेंगे। इन बैंकों में यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया और बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल हैं।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के वर्तमान में लगभग 21 करोड़ खाताधारक हैं, जबकि बैंक ऑफ़ इंडिया के वर्तमान में लगभग 5.5 करोड़ ग्राहक हैं। विलय के बाद, यह संख्या 25.5 करोड़ खातों तक पहुँच जाएगी, जो SBI के 26 करोड़ खाताधारकों से थोड़ी कम है। सरकार छोटे बैंकों का विलय बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, जैसे भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ कर सकती है।

सरकार का उद्देश्य क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें 2019 का मेगा विलय भी शामिल है। पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय करके एक बड़ा बैंक बनाया गया। वर्तमान योजना के तहत, सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या कम करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इससे डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में एकरूपता भी आएगी।

इस प्रस्ताव का एक मसौदा ‘चर्चा रिकॉर्ड’ के रूप में तैयार किया गया है। इसे अब कैबिनेट बैठक और फिर प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह मेगा बैंक विलय वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा हो जाएगा।

  1. इंडियन ओवरसीज बैंक 2. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 3. बैंक ऑफ इंडिया 4. बैंक ऑफ महाराष्ट्र

कितने बैंक बचेंगे?
अगर सरकार की विलय योजना तय समय सीमा के भीतर पूरी हो जाती है, तो देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या कम हो जाएगी। देश में केवल चार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बचेंगे। इस बड़े विलय के बाद, भारत में केवल SBI, PNB, BoB और केनरा बैंक ही बचेंगे।

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