अब इस दिन को पेंशन की गणना के लिए अंतिम कार्य दिवस माना जाएगा, सरकार को बताया गया

Saroj kanwar
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केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से चली आ रही उलझन को दूर कर दिया है। अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र या मृत्यु की तिथि को उसकी सेवा अवधि में शामिल किया जाएगा। यानी जिस दिन कर्मचारी सेवानिवृत्त होगा, उसे भी एक पूर्ण कार्य दिवस माना जाएगा।

यह निर्णय केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2021 के तहत लागू किया गया है और अब से पेंशन या पारिवारिक पेंशन की गणना के लिए इसका उपयोग किया जाएगा। इस निर्णय से कर्मचारियों के बीच वर्षों से चली आ रही इस उलझन का अंत हो गया है कि सेवानिवृत्ति या मृत्यु की तिथि को सेवा अवधि में शामिल किया जाएगा या नहीं।

सरकारी स्पष्टीकरण

कर्मचारी पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने हाल ही में एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र, सेवा से निष्कासन या मृत्यु की स्थिति में, संबंधित तिथि को कर्मचारी का अंतिम कार्य दिवस माना जाएगा। इसका अर्थ है कि उस दिन को भी सेवा अवधि के भाग के रूप में गिना जाएगा और पेंशन गणना में उसकी भूमिका होगी।

पहले, यह स्पष्ट नहीं था कि अंतिम दिन को सेवा अवधि में शामिल किया जाना चाहिए या नहीं, जिसके कारण अक्सर पेंशन निर्धारण में विवाद होते थे। अब, इस नियम ने इस अनिश्चितता को दूर कर दिया है।

छुट्टी और निलंबन की स्थिति में क्या होगा?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी सेवानिवृत्ति या मृत्यु से पहले छुट्टी पर है या निलंबित है, तो उस दिन को अलग कार्य दिवस नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई कर्मचारी छुट्टी के दौरान सेवानिवृत्त होता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उस दिन को अवकाश अवधि का हिस्सा माना जाएगा।

यह व्यवस्था छुट्टी या निलंबन की स्थिति में एक ही दिन की दोहरी गणना को रोकने और पेंशन गणना में किसी भी तकनीकी भ्रम या त्रुटि से बचने के लिए की गई है।

इस नियम को स्पष्ट करना क्यों आवश्यक था?
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सरकारी कर्मचारियों की पेंशन पूरी तरह से उनकी कुल सेवा अवधि पर निर्भर करती है। ऐसे में, अगर यह स्पष्ट न हो कि अंतिम दिन को सेवा अवधि का हिस्सा माना जाएगा या नहीं, तो पेंशन राशि के निर्धारण में असमानता और भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

कभी-कभी यह विवाद इतना बढ़ जाता था कि पारिवारिक पेंशन का निर्धारण भी प्रभावित होता था। सरकार के इस नए फैसले से अब यह समस्या दूर हो गई है और पेंशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता आई है।
कर्मचारियों और उनके परिवारों को लाभ

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों के हित में एक सकारात्मक और दूरगामी कदम है। इससे न केवल सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को लाभ होगा, बल्कि पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने वाले आश्रितों को भी राहत मिलेगी।

अब, प्रत्येक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की तिथि तक अपनी सेवा का पूरा हक मिलेगा। साथ ही, पेंशन गणना में किसी भी तकनीकी त्रुटि या विवाद की संभावना समाप्त हो जाएगी। इससे भविष्य में पेंशन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो जाएगी।

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