डरावनी मनोवैज्ञानिक हॉरर फिल्म – कहते हैं कि डर हमारे भीतर छिपे डर से पैदा होता है। कभी-कभी जो चीजें हमें हंसाती हैं, वही डर का कारण बन जाती हैं। जोकर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जोकर को हमेशा से बच्चों का मनोरंजन करने वाला और मुस्कुराने वाला किरदार माना जाता रहा है, लेकिन कुछ फिल्मों ने इसे डर का सबसे भयावह रूप बना दिया है। इस भयावह सफ़र की सबसे डरावनी कहानी हॉरर थ्रिलर फिल्म “आईटी” है—जो आज भी दुनिया भर के दर्शकों की रूह कंपा देती है।
“आईटी” में पेनीवाइज़ कौन है?
“आईटी” फिल्म श्रृंखला का पहला भाग 2017 में और दूसरा 2019 में रिलीज़ हुआ था। ये फिल्में स्टीफन किंग के प्रसिद्ध उपन्यास “आईटी” पर आधारित हैं। कहानी एक डरावने जोकर, पेनीवाइज़ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हर कुछ दशकों में काल्पनिक अमेरिकी शहर डेरी (मेन) लौटता है। पेनीवाइज़ बच्चों के डर का फायदा उठाता है—वह नालियों, अंधेरी गलियों और बंद कमरों में छिपकर अपने शिकारों को उनके ही डर से मार डालता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह काल्पनिक जोकर वास्तविकता से प्रेरित है?
एक सच्ची डरावनी कहानी: जॉन वेन गेसी
पेनीवाइज़ का किरदार असल ज़िंदगी के अमेरिकी सीरियल किलर जॉन वेन गेसी से प्रेरित है। गेसी ने 1972 से 1978 के बीच 33 नौजवान लड़कों की बेरहमी से हत्या की थी। गेसी दिन में एक सफल व्यवसायी और सोशलाइट बनकर रहता था, जबकि रात में वह अपने शिकारों को अपने घर बुलाकर उनकी बेरहमी से हत्या कर देता था। अपने अपराधों को छिपाने के लिए उसने कई लाशें अपने घर के नीचे दफना दीं। इतना ही नहीं, वह “पोगो द क्लाउन” नाम से जोकर बनकर पार्टियों और चैरिटी कार्यक्रमों में बच्चों का मनोरंजन भी करता था—और इस दोहरी ज़िंदगी ने उसके अपराधों को और भी भयानक बना दिया। उसे 1994 में उसके अपराधों के लिए फाँसी दे दी गई, लेकिन उसकी कहानी आज भी लोगों को अंदर तक झकझोर देती है।
जब हकीकत ने फिल्मों को डरना सिखाया
“आईटी” का पेनीवाइज़ और जॉन वेन गेसी—दोनों ही इस बात के प्रतीक हैं कि डर सिर्फ़ काल्पनिक नहीं है; यह इंसानी हक़ीक़त में भी छिपा हो सकता है। स्टीफन किंग की यह कहानी सिर्फ डरावनी नहीं है, बल्कि समाज के अंधेरे पक्ष के बारे में भी है, जहां मासूमियत के मुखौटे के पीछे खून की परतें छिपी हुई हैं।