नए आईटी नियम: डीपफेक रोकने के लिए सरकार सख्त कानून बनाने की योजना बना रही है, जानिए क्या है पूरा विवरण

Saroj kanwar
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भारत की बढ़ती डिजिटल दुनिया में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा निर्मित सामग्री, खासकर डीपफेक, की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के डीपफेक वीडियो पर विवाद के बाद इस तकनीक के दुरुपयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इस समस्या को रोकने के लिए, केंद्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है। एआई और डीपफेक वीडियो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2025’ का मसौदा जारी किया। इन नियमों का मुख्य लक्ष्य कृत्रिम और अवैध ऑनलाइन सामग्री को नियंत्रित करना है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यह कानून 15 नवंबर से पूरे देश में लागू हो सकता है। सरकार आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 87 के तहत संशोधन कर रही है।

‘कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना’ की नई परिभाषा
सरकार ने पहली बार AI द्वारा निर्मित सामग्री को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। नए नियमों के अनुसार, ‘कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना’ का अर्थ ऐसी कोई भी जानकारी है जो कंप्यूटर उपकरणों का उपयोग करके कृत्रिम रूप से या एल्गोरिदम द्वारा बनाई, उत्पन्न, संशोधित या परिवर्तित की गई हो और वास्तविक प्रतीत हो। इसमें डीपफेक, AI द्वारा संपादित चित्र, AI आवाज़ें और AI द्वारा निर्मित पाठ शामिल हैं।

पारदर्शिता और प्रामाणिकता के लिए सख्त नियम
सरकार ने AI सामग्री को स्पष्ट और ईमानदार बनाने के लिए नियम बनाए हैं:

ऑडियो लेबलिंग: किसी भी AI-निर्मित ऑडियो को प्लेबैक के पहले 10% भाग के भीतर यह घोषित करना होगा कि यह AI द्वारा बनाया गया है और वास्तविक नहीं है।
वीडियो लेबलिंग: AI द्वारा निर्मित वीडियो में स्क्रीन के लगभग 10% हिस्से को कवर करने वाला एक लेबल होना चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हो कि यह AI द्वारा बनाया गया है।
मेटाडेटा: सामग्री में उसका स्रोत, उपयोग किए गए उपकरण और संशोधन इतिहास शामिल होना चाहिए, ताकि उसकी उत्पत्ति का आसानी से पता लगाया जा सके।
प्लेटफ़ॉर्म के लिए दिशानिर्देश
फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य होस्टिंग साइटों जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की नई ज़िम्मेदारियाँ हैं:

उन्हें सभी AI सामग्री में लेबल और मेटाडेटा जोड़ना होगा।
उपयोगकर्ताओं को सामग्री को AI-जनित के रूप में चिह्नित करने का विकल्प मिलना चाहिए।
अवैध AI सामग्री को सरकारी या अदालती आदेश के 36 घंटों के भीतर हटाना होगा।
सरकारी उद्देश्य
इन नए नियमों के मुख्य लक्ष्य हैं:

गलत सूचना, छद्म पहचान और धोखाधड़ी को रोकना।
सामग्री को ट्रेस करने योग्य बनाना।
चुनाव और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करना।
नवाचार और ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना।
यूरोपीय संघ, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में भी AI सामग्री कानून हैं। भारत अब इस वैश्विक चलन में शामिल हो गया है। इन नियमों की सफलता तकनीक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा पर निर्भर करेगी। अगर सही तरीके से किया जाए, तो भारत AI सामग्री को नियंत्रित करने में एक विश्वस्तरीय उदाहरण स्थापित कर सकता है।

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