8वां वेतन आयोग: चालू वर्ष 7वें वेतन आयोग का अंतिम वर्ष है। ऐसे में सरकार ने इसी साल जनवरी में वादा किया था कि वित्त मंत्रालय जल्द ही 8वें वेतनमान के लिए एक आयोग का गठन करेगा।
हालांकि यह पूरा साल बीतने को है, लेकिन सरकार अपने वादे को पूरा करने में आगे नहीं बढ़ पाई है। केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य कर्मचारियों को भी भरोसा है कि केंद्र स्तर पर नया वेतनमान लागू होने के बाद, राज्य सरकारें भी इसे लागू करेंगी।
हालांकि कुछ चौंकाने वाली राय भी हैं।
इस बीच, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आठवें वेतन आयोग को लेकर कुछ चौंकाने वाले सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है। सुभाष चंद्र गर्ग के अनुसार, आयोग बनाने के बजाय, सरकार सीधे प्रधानमंत्री के ज़रिए 10-15 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा कर सकती है। गर्ग की यह भविष्यवाणी कर्मचारियों के लिए चिंताजनक है। चालू वर्ष 2025 समाप्त होने में अब केवल दो महीने शेष हैं, और आयोग के सदस्यों की नियुक्ति अभी बाकी है।
अन्य विशेषज्ञों की राय
हालांकि, सी. श्रीकुमार की राय अलग है। वे अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव हैं, जो रक्षा क्षेत्र के असैन्य कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे बड़ी ट्रेड यूनियनों में से एक है। उनका कहना है कि ऐसी संभावना कम ही है। इसकी वजह यह है कि आठवें वेतन आयोग की घोषणा कैबिनेट के फैसले के आधार पर की गई थी। सरकार को वेतन आयोग का गठन करना ही होगा। संभव है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन में कुछ महीनों की देरी हो।
सरकार को उस अवधि का बकाया भुगतान करना होगा। केंद्रीय सरकारी कर्मचारी एवं श्रमिक परिसंघ के महासचिव एसबी यादव का कहना है कि सरकार आयोग के गठन में अनावश्यक रूप से देरी कर रही है। सरकार को बिना किसी देरी के आयोग का गठन करना चाहिए।