नई दिल्ली: गोवर्धन के बाद 23 अक्टूबर को देशभर में भैया दूज का त्योहार मनाया जाएगा और लोग इसे लेकर उत्साहित हैं। भैया दूज भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर चंदन का तिलक लगाती हैं और उन्हें मिठाई खिलाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें उपहार देते हैं।
इस वर्ष भैया दूज 23 अक्टूबर को मनाई जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, भैया दूज का शुभ मुहूर्त मात्र 2 घंटे 15 मिनट का है। अगर आप अपने भाई को राखी बाँधने की सोच रही हैं, तो पहले शुभ मुहूर्त जान लें। नीचे भैया दूज से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें जानें, जिससे आपकी कोई भी उलझन दूर हो जाएगी।
भैया दूज क्यों मनाई जाती है?
ज़्यादातर लोग सोच रहे होंगे कि भैया दूज क्यों मनाई जाती है। दरअसल, हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान यम अपनी बहन यमुना के घर कालांतर मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आए थे। यही वह समय था जब यमुना ने अपने भाई यम का बड़े आदर-सत्कार के साथ स्वागत किया, उन्हें भोजन कराया और उनकी पूजा की।
तभी से, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाई जाती है। इस दिन आयुष्मान और शिववास योग सहित कई शुभ योग बन रहे हैं। इन योगों में यमराज की पूजा करने से भाई को आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। नीचे जानिए भाई दूज का शुभ मुहूर्त क्या होगा।
भाई दूज का शुभ मुहूर्त क्या है?
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, गुरुवार, 23 अक्टूबर को रात्रि 10:46 बजे तक अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसके बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि प्रारंभ होगी। बहनें अपनी सुविधानुसार भाई दूज पर यमराज की पूजा कर सकती हैं।’
जानें तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे के बीच तिलक (सिंदूर का टीका) लगाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही रक्षा सूत्र भी बांधा जा सकता है। कुल मिलाकर भाई दूज पर तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 15 मिनट का माना जा रहा है। यह योग रात 10:46 बजे समाप्त हो रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव जगत जननी मां गौरी के साथ कैलाश पर रहेंगे।