बिहार विधानसभा चुनाव 2025 – बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी आखिरकार बज चुकी है, सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर रहे हैं। बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी नामांकन दाखिल कर रहे हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी अपने तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया है।
अपने नामांकन हलफनामे में उन्होंने 10 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति घोषित की है। उनकी उम्र और शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा नेता ने गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया, जिससे उनकी योग्यता को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
हलफनामे में क्या जानकारी दी गई?
सम्राट चौधरी ने नामांकन के दौरान अपने हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति और लंबित मामलों का ब्योरा दिया। हलफनामे के अनुसार, उन पर दो आपराधिक मामले चल रहे हैं। एक मामला पटना का है, जिसमें उन पर 2023 के अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप है। दूसरा मामला उनके गृह ज़िले मुंगेर का है।
पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला उनके ख़िलाफ़ दर्ज किया गया था। सम्राट चौधरी एक दशक से भी ज़्यादा समय के बाद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पास ₹99.32 लाख की चल संपत्ति और ₹8.28 करोड़ की अचल संपत्ति है। 23 पन्नों के हलफनामे में वरिष्ठ भाजपा नेता की उम्र और शैक्षणिक योग्यता के बारे में अस्पष्ट जानकारी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
प्रशांत किशोर ने भी उठाए हैं सवाल
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी सम्राट चौधरी की जन्मतिथि और शैक्षणिक योग्यता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। किशोर ने आरोप लगाया कि चौधरी ने 1995 में तारापुर में सात लोगों की हत्या से जुड़े एक मामले में “फर्जी” प्रमाण पत्र जमा करके अभियोजन से बचने की कोशिश की थी।
यह घटना के समय उन्हें नाबालिग दिखाने की साजिश थी। प्रशांत किशोर के अनुसार, अगर सम्राट चौधरी ने 2020 में विधान परिषद के लिए अपने हलफनामे में अपनी उम्र 51 साल बताई होती, तो 1995 में उनकी उम्र लगभग 25-26 साल रही होती।