EPFO अपडेट – कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को लेकर बड़ी खबर है। जानकारी के मुताबिक, EPFO जल्द ही अपने निवेश पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, EPFO केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और भारत 22 एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में किए गए निवेश को भुनाने के लिए अपने केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) से मंजूरी मांगेगा।
सूत्रों के मुताबिक, अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो EPFO को करीब 17237 करोड़ रुपये का पूंजीगत लाभ होगा, जो बाद में कर्मचारियों के वार्षिक ब्याज खाते में जुड़ जाएगा। हालांकि, EPFO ने अन्य ETF योजनाओं में अपने निवेश को जारी रखने का फैसला किया है।
निवेश अवधि बढ़ाने की योजना
सूत्रों के अनुसार, ईपीएफओ बाजार में स्थिरता और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए इन निवेशों की अवधि चार साल से बढ़ाकर पाँच साल करने की योजना बना रहा है। वित्त मंत्रालय के निवेश पैटर्न के अनुसार, ईपीएफओ को अपने नए निवेश का 5 से 15 प्रतिशत इक्विटी और संबंधित उपकरणों में निवेश करना आवश्यक है। ईपीएफओ को 2017 में सीबीटी की मंजूरी मिलने के बाद ईटीएफ में निवेश करने की अनुमति दी गई थी, जिसके तहत यह फंड अपने वृद्धिशील फंड का 15% तक निवेश करता है।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में रविवार को सीबीटी की बैठक होगी। लगभग 18 प्रमुख एजेंडा मदों पर चर्चा की जाएगी। सीबीटी, ईपीएफओ का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है, जिसमें नियोक्ता, कर्मचारी, राज्य और केंद्र सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। वर्तमान में, ईपीएफओ 30 करोड़ से अधिक सदस्य खातों का प्रबंधन करता है, और इसका कुल फंड लगभग 28 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। आगामी बैठक लाखों कर्मचारियों के लिए ब्याज दरों और निवेश लाभांश पर प्रभाव का निर्धारण करेगी।