डिजिटल बैंकिंग के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, RBI जल्द ही ‘डिपॉज़िट टोकनाइज़ेशन’ के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। इसका मतलब है कि आपके बैंक खाते में जमा धनराशि डिजिटल टोकन में बदल जाएगी! यह क्रांतिकारी प्रक्रिया न केवल बैंकिंग लेनदेन को बेहद तेज़ और सुरक्षित बनाएगी, बल्कि भविष्य में आपके धन प्रबंधन के तरीके को भी पूरी तरह से बदल सकती है। इस ब्लॉकचेन-आधारित प्रणाली का परीक्षण शुरुआत में चुनिंदा बैंकों के साथ किया जाएगा।
‘डिपॉज़िट टोकनाइज़ेशन’ क्या है?

डिजिटल बैंकिंग के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, RBI जल्द ही ‘डिपॉज़िट टोकनाइज़ेशन’ के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। इसका मतलब है कि आपके बैंक खाते में जमा धनराशि डिजिटल टोकन में बदल जाएगी! यह क्रांतिकारी प्रक्रिया न केवल बैंकिंग लेनदेन को बेहद तेज़ और सुरक्षित बनाएगी, बल्कि भविष्य में आपके धन प्रबंधन के तरीके को भी पूरी तरह से बदल सकती है। इस ब्लॉकचेन-आधारित प्रणाली का परीक्षण शुरुआत में चुनिंदा बैंकों के साथ किया जाएगा।
‘डिपॉज़िट टोकनाइज़ेशन’ क्या है?
जनता को क्या लाभ होंगे
यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो जनता और बैंकिंग प्रणाली, दोनों को असाधारण लाभ प्राप्त होंगे। ब्लॉकचेन तकनीक धन हस्तांतरण और लेनदेन निपटान को मौजूदा प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ बना देगी। लेनदेन पारंपरिक बैंकिंग प्रक्रियाओं की तुलना में सस्ते हो सकते हैं। ब्लॉकचेन की सुरक्षा धोखाधड़ी की संभावना को कम करेगी और पारदर्शिता बढ़ाएगी। यदि यह योजना सफल होती है, तो भविष्य में ग्राहक अपनी जमा राशि, निवेश या यहाँ तक कि सरकारी बॉन्ड को भी डिजिटल टोकन के रूप में सुरक्षित कर सकेंगे।
आरबीआई किस तकनीक का उपयोग करेगा

इस पायलट प्रोजेक्ट में RBI अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के थोक खंड का उपयोग करेगा। यह वही ब्लॉकचेन-आधारित तकनीक है जिसका उपयोग बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच बड़े लेनदेन निपटाने के लिए किया जाता है।
डिजिटल मुद्रा की सफलता
RBI ने 1 नवंबर, 2022 को सरकारी प्रतिभूतियों के लेनदेन के लिए अपनी डिजिटल मुद्रा का थोक पायलट प्रोजेक्ट पहले ही लॉन्च कर दिया था। इसके बाद, 1 दिसंबर, 2022 को खुदरा पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया, जिससे व्यक्ति-से-व्यक्ति और व्यक्ति-से-व्यवसाय लेनदेन की सुविधा प्रदान की गई। मार्च 2024 तक, खुदरा डिजिटल मुद्रा का उपयोग ₹6 करोड़ से बढ़कर ₹234 करोड़ हो गया, जो डिजिटल मुद्रा में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।