यात्रियों की पसंदीदा वंदे भारत एक्सप्रेस एक नए युग की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वंदे भारत चेयर कार संस्करणों के सफल संचालन के बाद, अब यह स्लीपर क्लास ट्रेन के रूप में भी चलेगी। स्लीपर क्लास वंदे भारत, सामान्य चेयर कार वंदे भारत एक्सप्रेस की तुलना में ज़्यादा लंबी दूरी तय करेगी। इस ट्रेन के नए संस्करण को लेकर पहले से ही काफ़ी चर्चा हो रही है।
वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर क्लास के बारे में कुछ जानकारी पहले ही इंटरनेट पर उपलब्ध है। लेकिन, अभी और जानकारी आनी बाकी है। क्या आप जानते हैं कि एक स्लीपर वंदे भारत ट्रेन में कितने कोच हो सकते हैं? आमतौर पर एक चेयर कार वंदे भारत ट्रेन में 16 कोच होते हैं, क्या स्लीपर संस्करण में कोचों की संख्या ज़्यादा होगी? आइए जानते हैं।
वंदे भारत एक्सप्रेस में स्लीपर ट्रेन में कितने कोच होंगे?
रेल मंत्रालय के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने बताया कि पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का निर्माण चेन्नई स्थित आईसीएफ में किया जा रहा है। इसमें 16 कोच होंगे। राजधानी एक्सप्रेस की तरह इसमें भी एसी 1, एसी 2 और एसी 3 क्लास होंगे। पूरी ट्रेन एक बार में 1,128 यात्रियों को ले जा सकती है। इसे 180 किमी/घंटा की गति के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।
स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस में और कोच?
उन्होंने आगे कहा कि ज़रूरत पड़ने पर डिब्बों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। चूँकि यह ट्रेन लंबी दूरी तय करेगी, इसलिए दो ट्रेन सेट की आवश्यकता होगी। एक ट्रेन पहले से ही तैयार है और दिल्ली के शकूरबस्ती में खड़ी है, जबकि दूसरी ट्रेन चेन्नई के आईसीएफ में लगभग तैयार है।
यह मौजूदा वंदे भारत ट्रेनों से अलग होगी। इसमें स्लीपर कोच, एसी फर्स्ट क्लास, टू-टियर और थ्री-टियर स्लीपर बर्थ होंगे, जिससे रात का सफ़र हवाई जहाज़ जितना आरामदायक होगा। ट्रेन में सॉफ्ट लाइटिंग, स्वचालित दरवाज़े, बायो-टॉयलेट, सीसीटीवी, एलईडी स्क्रीन और आधुनिक इंटीरियर होंगे। सुरक्षा सुविधाओं में आर्मर सिस्टम, क्रैश-प्रूफ डिज़ाइन और एंटी-क्लाइंबर फ़ीचर शामिल हैं।
दो प्रकार की वंदे भारत एक्सप्रेस में मुख्य अंतर क्या है?
जिस तरह वंदे भारत में चेयर कार और एक्ज़ीक्यूटिव क्लास में अंतर होता है, उसी तरह फ़र्स्ट एसी, थर्ड और सेकंड एसी में भी अंतर होगा। इस क्लास के यात्रियों को ज़्यादा सुविधाएँ मिलेंगी, जिनमें ज़्यादा आरामदायक बर्थ और गद्देदार सीटें शामिल हैं। इस क्लास के यात्रियों को हवाई जहाज़ जैसी सुविधाएँ देने की कोशिशें जारी हैं। इसके अलावा, खाने-पीने की चीज़ें भी अन्य क्लास के मुक़ाबले ज़्यादा ख़ास होंगी। इसके अलावा, इन डिब्बों में अटेंडेंट की संख्या भी ज़्यादा होगी।