Wheat varieties : कम पानी में चाहिए अधिक पैदावार, तो बोएं गेहूं कि यह वैरायटी

Saroj kanwar
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धान की कटाई अब शुरू हो चुकी है. ऐसे में धान की कटाई होने के बाद किसान गेहूं की बुवाई शुरू कर देते हैं. गेहूं की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. कम लागत में अधिक मुनाफा गेहूं की खेती से कमाया जा सकता है, तो वहीं गेहूं की डिमांड बाजारों में अधिक रहती है.

ऐसे में अगर आप भी गेहूं की खेती करना चाहते हैं, तो सबसे पहले गेहूं की किस्म के बारे में जानकारी लें
कई बार सही से बीजों का चयन न हो पाने के कारण फसल उत्पादन में कमी आती है जिस कारण किसानों का लाखों रुपए का नुकसान हो जाता है. कई ऐसी गेहूं की किस्में हैं, जिन्हें किसान कम लागत में उगाकर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. खास बात यह है कि कुछ किस्में कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन देती हैं.

पूसा तेजस एक उच्च पैदावार और रोग प्रतिरोधी गेहूं की किस्म है, गेहूं की यह किस्म 65 से 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है. पूसा तेजस काले और भूरे रतुआ रोग के लिए प्रतिरोधी है. इसका दाना बड़ा, चमकदार और लंबा होता है. बुवाई के बाद यह 115 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और इसके एक पौधे में 10 से 12 कल्ले होते हैं, जो पैदावार बढ़ाने में मदद करते हैं.


GW 322 गेहूं की एक लोकप्रिय किस्म है, जिसे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान विशेष रूप से उगाते हैं. यह किस्म प्रति हेक्टेयर 60 से 65 क्विंटल तक उत्पादन देती है. GW 322 सूखे की स्थिति को सहन कर सकती है और इसे सिर्फ 3 से 4 बार सिंचाई की जरूरत होती है. यह किस्म भी कई आम बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है और 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है.

HD 4728, जिसे पूसा मालवी के नाम से भी जाना जाता है अक्टूबर और नवंबर के माह में समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त है. यह किस्म मध्य भारत के लिए विशेष रूप से अच्छी है और 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. प्रति हेक्टेयर यह 55 से 57 क्विंटल तक उत्पादन देती है और इसे 3 से 4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है.

श्रीराम 11 गेहूं की किस्म किसानों के बीच काफी

लोकप्रिय है. यह किस्म देर से बुवाई के लिए उपयुक्त है और 3 महीने में तैयार हो जाती है. इसका दाना चमकदार होता है और यह औसतन 22 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देती है.

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