एमसीबीयू में कक्षाएं न होने से शिक्षा का स्तर गिरा, छात्र खाली समय में व्यस्त

Saroj kanwar
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Damoh News: महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई में गंभीर व्यवधान देखने को मिल रहा है। विद्यार्थी समय पर कक्षाओं में पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले प्राध्यापक और अतिथि विद्वान अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। गुरुवार को भी विश्वविद्यालय में कक्षाओं की स्थिति देखने पर यही हाल सामने आया।

बीए की कक्षाएं सुबह 8 से 12 बजे और बीएससी की कक्षाएं सुबह 10 से शाम 4 बजे तक निर्धारित की गई हैं। विद्यार्थियों को पांच सेक्शन में बांटकर पढ़ाने की योजना बनाई गई है, लेकिन प्राध्यापक तय समय पर कक्षा में नहीं पहुंचते। इसका परिणाम यह होता है कि छात्र खाली बैठते हैं या घर लौट जाते हैं। सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।

एमए थर्ड सेमेस्टर की कक्षा में दोपहर करीब 12:38 बजे विद्यार्थी तो बैठे थे, लेकिन कोई प्राध्यापक उपस्थित नहीं था। विद्यार्थी समय बिताने के लिए एक-दूसरे के हाथों में मेहंदी लगाते दिखाई दिए। वहीं बीएससी फिजिक्स की कक्षा में 12:50 पर पर्याप्त विद्यार्थी मौजूद थे, लेकिन प्राध्यापक नहीं आए। कुछ छात्रों ने बताया कि यह स्थिति रोज बनती है और पढ़ाई प्रभावित हो रही है।वर्तमान सत्र 2025-26 में विश्वविद्यालय में 145 डिग्री और डिप्लोमा कोर्सेज के लिए 9500 सीटें निर्धारित की गई थीं, लेकिन केवल 6404 सीटें ही भरी गईं और 3096 सीटें खाली हैं। शिक्षा व्यवस्था कमजोर होने से विद्यार्थी प्राइवेट कॉलेजों की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रयोगात्मक कक्षाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। लैब आधारित विषयों में उपकरणों की कमी और प्राध्यापकों की अनुपलब्धता के कारण पाठ्यक्रम अधूरा रह जाता है। छात्र मांग कर रहे हैं कि नियमित रूप से प्रायोगिक कक्षाएं शुरू की जाएं। अधिकांश प्रायोगिक कक्षाएं शाम 4 बजे के बाद रखी गई हैं, लेकिन प्राध्यापक उस समय भी अनुपस्थित रहते हैं।

बीएससी मेजर थर्ड सेमेस्टर की कक्षा में केवल एक छात्र उपस्थित था। उसने बताया कि अन्य विद्यार्थी प्राध्यापक के न आने के कारण परिसर में घूमने चले गए। विश्वविद्यालय शेड्यूल के अनुसार प्राध्यापकों को कक्षाओं में शिक्षण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन अनुपालन की स्थिति असंतोषजनक है।छात्रों की लगातार शिकायतों और पढ़ाई बाधित होने के बावजूद अब तक पर्याप्त सुधार नहीं हुआ। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि अनुपस्थिति के मामलों को दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। छात्रों और अधिकारियों दोनों की मांग है कि नियमित समय पर कक्षाएं हों, ताकि शैक्षणिक नुकसान कम किया जा सके और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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