Cotton Rate : देश के किसानों की बढ़ी मुसीबत, कपास की कीमतों में आई भारी गिरावट 

Saroj kanwar
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दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर अंत तक आयात शुल्क हटने से घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ऐसे में किसानों की एकमात्र उम्मीद कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई के सरकारी खरीद केंद्रों से थी लेकिन टेंडर प्रक्रिया में सीसीआई द्वारा लगाई गई कड़ी शर्तों के कारण, देश भर के जिनर्स ने इस प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया है। इससे किसानों पर दोहर मार पड़ रही है।

महाराष्ट्र जिनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राजपाल का कहना है कि राज्य की 900 जिनिंग कंपनियों में से केवल 7 से 8 कंपनियों ने ही सीसीआई के टेंडर में भाग लिया है, जबकि 98 फीसदी जिनिंग कंपनियों ने टेंडर में भाग नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि सीसीआई ने चालू सीजन में काटन की खरीद के नियमों में बदलाव किया है।

सीसीआई ने नई शर्त में कपास वापसी, जो कि पहले एक महीने के लिए निर्धारित थी, उसे घटाकर अब केवल 15 दिन कर दिया है। इसी तरह से सीसीआई ने जिनर्स की 3 फीसदी की गिरावट को घटाकर भी 2.5 फीसदी कर दिया है। सीसीआई ने खरीद केंद्र शुरू करने के लिए, उद्यमियों को स्थानीय नगरपालिका या नगर निगम से प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक किया है। इससे सीसीआई केंद्र के खुलने पर ही सवाल उठ खड़े हुए हैं और कपास किसानों को नुकसान होने की संभावना है।

हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में एकतरफा बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अगर इसी तरह से जिनर्स का बहिष्कार जारी रहा और सीसीआई ने राज्य में कपास के खरीद केंद्र शुरू नहीं किए है, तो फिर किसानों को 8,100 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी मिलना कठिन हो जाएगा। आयात शुल्क समाप्त होने से इस साल विदेशों से लगभग 50 लाख गांठ कपास आयात होने की संभावना है, जबकि उद्योग का मानना है कि चालू सीजन में कपास का उत्पादन अनुमान भी ज्यादा है।

अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ा देने से गारमेंट इकाया उत्पादन में कटौती कर रही है, जिस कारण यार्न की मांग भी सामान्य की तुलना में कमजोर है। इससे कपास की घरेलू मांग कम हो सकती है और हाजिर बाजार में कीमतें गिर सकती हैं। इस बीच, राज्यव्यापी जिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्षों ने यह रुख अपनाया है कि अगर जिनर्स की मांगें पूरी नहीं हुईं तो बहिष्कार जारी रहेगा।

उधर कपास विपणन महासंघ के संभागीय अध्यक्ष संजय पवार ने मांग की है कि अगर सीसीआई खरीद केंद्र शुरू नहीं करती है, तो विपणन महासंघ को सरकारी खरीद केंद्र खोलने चाहिए। अगर भविष्य में सीसीआई खरीद केंद्र शुरू भी हो जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सीसीआई पूरा उत्पाद खरीद लेगा। इसलिए, कई किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी। ऐसे में, अगर विपणन महासंघ खरीद केंद्र शुरू करता है, तो इससे किसानों को एमएसपी मिलने में मदद मिलेगी।

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