राशन बंद होने से छोटे किसान और महिलाओं की मुश्किलें बढ़ीं, पद से इस्तीफे देकर जताया विरोध

Saroj kanwar
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जिले में लगभग 334 ऐसे लोग चिन्हित किए गए हैं, जो किसी संस्था या कंपनी के डायरेक्टर के रूप में दर्ज हैं। इनमें गरीब किसान और महिलाएँ भी शामिल हैं, जिन्हें केवल पद पर नाम होने के कारण अपात्र मान लिया गया। दूसरी ओर, कई सरकारी कर्मचारी और व्यापारी जो वास्तव में सक्षम हैं, वे अभी भी मुफ्त राशन ले रहे हैं और नोटिस का जवाब देने से भी बच रहे हैं।

किसानों की दलील

किसानों का कहना है कि कंपनी से कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता। उनका जुड़ाव केवल किसानों को संगठित करने और सामूहिक रूप से कृषि कार्यों को बढ़ावा देने के लिए है। लेकिन यदि इस कारण से उनके परिवार का राशन बंद होता है, तो पद त्यागना ही बेहतर है। कई किसानों ने लिखित में इस्तीफा देकर कहा कि परिवार की गुजर-बसर पूरी तरह राशन पर निर्भर है।

मजदूरों की भी सूची में गिनती

कुछ मजदूर परिवारों को भी नोटिस थमा दिए गए हैं। रायपुर की मिथलेश यादव, जो एक स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, ने बताया कि उन्हें कोई मानदेय नहीं मिलता, फिर भी राशन रोक दिया गया। इसी तरह रैकवार परिवार के कुछ सदस्यों ने भी एफपीओ से इस्तीफा दे दिया। अजनौर के श्यामवर्ण अहिरवार जैसे मजदूरों पर छह लाख की आय दर्शाकर नोटिस दिया गया, जबकि वे दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार पालते हैं।

सरकारी कर्मचारी चुप

जांच में सामने आया कि कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी राशन ले रहे थे। नोटिस दिए जाने के बावजूद अधिकांश ने कोई जवाब नहीं दिया। जिलेभर में 1109 लोगों के नाम सामने आए, जिनमें से 1011 को नोटिस भेजे गए, लेकिन अब तक केवल 84 लोगों ने ही जवाब दिया है। शेष ने चुप्पी साध रखी है।

ब्लॉकवार स्थिति

टीकमगढ़ ब्लॉक: 303 नोटिस, 60 जवाब

बल्देवगढ़: 213 नोटिस, 06 जवाब

जतारा: 275 नोटिस, 13 जवाब

अन्य ब्लॉकों में भी स्थिति लगभग यही है।

प्रशासन की तैयारी

जिन अपात्र लोगों ने अब तक जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों के मामले में शासन स्तर से मार्गदर्शन लिया जाएगा। यदि वे शपथ पत्र देकर स्पष्ट करते हैं कि उन्हें कंपनी से कोई लाभ नहीं है, तो निर्णय उसी आधार पर होगा।

Tikamgarh News: जिले में राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए केवाईसी प्रक्रिया लागू की गई है। लेकिन इस दौरान कई गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं। छोटे किसान और स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएँ, जो किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओ) में डायरेक्टर या प्रमोटर के पद पर नाममात्र के तौर पर जुड़ी हुई हैं, उनका निशुल्क राशन बंद कर दिया गया। जबकि उन्हें कंपनी से न तो कोई वेतन मिलता है और न ही कोई भत्ता। ऐसे में कई किसानों और महिलाओं ने मजबूर होकर एफपीओ से इस्तीफा दे दिया।

334 हितग्राही प्रभावित

जिले में लगभग 334 ऐसे लोग चिन्हित किए गए हैं, जो किसी संस्था या कंपनी के डायरेक्टर के रूप में दर्ज हैं। इनमें गरीब किसान और महिलाएँ भी शामिल हैं, जिन्हें केवल पद पर नाम होने के कारण अपात्र मान लिया गया। दूसरी ओर, कई सरकारी कर्मचारी और व्यापारी जो वास्तव में सक्षम हैं, वे अभी भी मुफ्त राशन ले रहे हैं और नोटिस का जवाब देने से भी बच रहे हैं।

किसानों की दलील

किसानों का कहना है कि कंपनी से कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलता। उनका जुड़ाव केवल किसानों को संगठित करने और सामूहिक रूप से कृषि कार्यों को बढ़ावा देने के लिए है। लेकिन यदि इस कारण से उनके परिवार का राशन बंद होता है, तो पद त्यागना ही बेहतर है। कई किसानों ने लिखित में इस्तीफा देकर कहा कि परिवार की गुजर-बसर पूरी तरह राशन पर निर्भर है।

मजदूरों की भी सूची में गिनती

कुछ मजदूर परिवारों को भी नोटिस थमा दिए गए हैं। रायपुर की मिथलेश यादव, जो एक स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, ने बताया कि उन्हें कोई मानदेय नहीं मिलता, फिर भी राशन रोक दिया गया। इसी तरह रैकवार परिवार के कुछ सदस्यों ने भी एफपीओ से इस्तीफा दे दिया। अजनौर के श्यामवर्ण अहिरवार जैसे मजदूरों पर छह लाख की आय दर्शाकर नोटिस दिया गया, जबकि वे दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार पालते हैं।

सरकारी कर्मचारी चुप

जांच में सामने आया कि कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी राशन ले रहे थे। नोटिस दिए जाने के बावजूद अधिकांश ने कोई जवाब नहीं दिया। जिलेभर में 1109 लोगों के नाम सामने आए, जिनमें से 1011 को नोटिस भेजे गए, लेकिन अब तक केवल 84 लोगों ने ही जवाब दिया है। शेष ने चुप्पी साध रखी है।

ब्लॉकवार स्थिति

टीकमगढ़ ब्लॉक: 303 नोटिस, 60 जवाब

बल्देवगढ़: 213 नोटिस, 06 जवाब

जतारा: 275 नोटिस, 13 जवाब

अन्य ब्लॉकों में भी स्थिति लगभग यही है।

प्रशासन की तैयारी

जिन अपात्र लोगों ने अब तक जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों के मामले में शासन स्तर से मार्गदर्शन लिया जाएगा। यदि वे शपथ पत्र देकर स्पष्ट करते हैं कि उन्हें कंपनी से कोई लाभ नहीं है, तो निर्णय उसी आधार पर होगा।

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