गरीबों के नाम पर कारोबार: अपात्रों ने हथियाया राशन व पेट्रोल पंप, असली जरूरतमंद संकट में

Saroj kanwar
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Tikamgarh News: टीकमगढ़ ज़िले में राशन वितरण प्रणाली और आरक्षित कोटे में हो रहे दुरुपयोग के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे हैं, जिनकी आय पात्रता से कई गुना अधिक है। वहीं, कई गरीब और जरूरतमंद परिवार हैं जिनका नाम अपात्रों की इस सूची में फंसने से मुफ्त राशन बंद होने की कगार पर है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी वर्ग के नाम पर स्वीकृत पेट्रोल पंप भी प्रभावशाली कारोबारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। असली हकदारों को न तो पेट्रोल पंप से फायदा मिल रहा है और न ही राशन योजना से राहत।

गंगाराम सौर का मामला: नाम पर पेट्रोल पंप, जेब खाली

बल्देवगढ़ के डारगुवां गांव के गंगाराम सौर मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आदिवासी कोटे से उनके नाम पर पेट्रोल पंप स्वीकृत हुआ, लेकिन संचालन शहर के एक व्यापारी के हाथों में है। गंगाराम को शुरूआत में महज़ 11 हजार रुपए थमा दिए गए और उसके बाद से कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि दस्तावेज़ों में गंगाराम की आय छह लाख से ऊपर दिखाई जा रही है। इसी आधार पर उनका नाम अपात्र हितग्राहियों की सूची में डाल दिया गया, जबकि वास्तविकता में उनका परिवार मुफ्त राशन पर निर्भर है।

1109 अपात्र हितग्राही चिन्हित

जिले में करीब 1109 ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्हें गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इनमें से 13 लोग व्यापारी हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 25 लाख से ज्यादा है और वे जीएसटी दाता भी हैं। 334 लोग कंपनियों या संस्थाओं के डायरेक्टर हैं, जबकि 762 लोग ऐसे हैं जिनकी आय 6 लाख रुपए से अधिक है। नियमों के मुताबिक, ये सभी लोग निशुल्क राशन योजना के पात्र नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से लाभ ले रहे थे।

जयप्रकाश का मामला: बुटीक मालिकों के लेनदेन से फंसा खाता

जतारा क्षेत्र के बम्हौरी अब्दा निवासी जयप्रकाश वंशकार दिल्ली में एक बुटीक पर नौकरी करते हैं। उनकी मासिक आय महज 15 हजार रुपए है। लेकिन बुटीक संचालक कई बार अपने लेन-देन जयप्रकाश के बैंक खाते से कराते हैं। इससे खाते में टर्नओवर बढ़ा हुआ दिख रहा है और दस्तावेजों में आय छह लाख से ऊपर दिखाई गई। नतीजतन उनका नाम भी अपात्रों की सूची में दर्ज हो गया है। जयप्रकाश का कहना है कि अगर राशन बंद हो गया तो उनके परिवार का गुजारा मुश्किल हो जाएगा।

श्रीराम चढ़ार का उदाहरण: मजदूरी के बदले बैंक खाता

खरगापुर के श्रीराम चढ़ार दिहाड़ी मजदूर हैं और रोज़ी-रोटी के लिए दिल्ली में काम कर रहे हैं। लेकिन उनके खाते से स्थानीय गल्ला व्यापारी लेन-देन करता है। व्यापारी ने उनका एटीएम अपने पास रखा है और समय-समय पर एक-दो हजार रुपए उन्हें थमा देता है। इससे खाते में भारी रकम का ट्रांजेक्शन दिखता है और सरकार के रिकॉर्ड में श्रीराम की आय पात्रता सीमा से ऊपर चली गई है। अब उनका राशन कार्ड भी रद्द होने की स्थिति में है।

जरूरतमंद परिवारों पर संकट

इन मामलों का सबसे बड़ा असर उन असली गरीबों पर पड़ रहा है, जो पूरी तरह से राशन योजना पर निर्भर हैं। प्रशासन का कहना है कि जिनके नाम से फर्जीवाड़ा किया गया है या जिनके खाते से अन्य लोग लेन-देन कर रहे हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि वास्तविक पात्र लोगों को राशन से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।

सरकारी कार्रवाई और सवाल

जिला आपूर्ति विभाग ने सभी अपात्र हितग्राहियों को नोटिस जारी किया है और 15 दिन में जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि सही जांच के बाद असली पात्रता तय की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि इतने वर्षों तक यह गड़बड़ी कैसे चलती रही और गरीबों का हक छिनता रहा।

गंगाराम के नाम पर 25 लाख का कारोबार

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गंगाराम सौर जैसे मजदूर के नाम पर कागजों में 25 लाख रुपए से ज्यादा का टर्नओवर दिखाया गया है। असल में पेट्रोल पंप का पूरा लाभ व्यापारी उठा रहे हैं और गंगाराम जैसे असली हकदार केवल मजदूरी कर अपने परिवार का पेट भर रहे हैं। अगर इनका राशन भी बंद हो गया, तो जीवन-यापन और कठिन हो जाएगा।

यह पूरा मामला दिखाता है कि किस तरह योजनाओं का असली लाभ गरीब और जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। आदिवासी कोटे का पेट्रोल पंप प्रभावशाली लोगों ने हड़प लिया, तो वहीं अपात्र अमीर वर्ग मुफ्त राशन योजना का फायदा उठाता रहा। अब प्रशासन के लिए यह बड़ी चुनौती है कि असली जरूरतमंदों को न्याय कैसे दिलाया जाए और ऐसे गड़बड़झाले पर लगाम कैसे लगाई जाए।

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