टीबी वार्ड की ऑक्सीजन लाइन बंद, मरीजों को आईसीयू और मेडिकल वार्ड में भर्ती कर रहे

Saroj kanwar
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Dhaar News: जिला अस्पताल में टीबी मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया गया है, लेकिन ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद होने की वजह से उन्हें वहां भर्ती नहीं किया जा रहा। मरीजों को आईसीयू और मेल मेडिकल वार्ड में सामान्य मरीजों के साथ रखा जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोरोनाकाल के दौरान टीबी वार्ड की ऑक्सीजन पाइप चोरी हो गई थी, जिसके बाद से लाइन दोबारा नहीं डाली गई। इस कारण ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों को अन्य वार्डों में भर्ती करना मजबूरी है। दावा यह भी किया जा रहा है कि मरीजों को मास्क पहनाकर सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है, लेकिन वार्ड में रहते हुए कई बार मरीज मास्क हटा लेते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। अभियान के तहत 2025 तक 5 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करनी है। अभी तक 2 लाख 15 हजार से अधिक लोगों की जांच हो चुकी है, जिनमें से 3 हजार 200 मरीज टीबी के मिले हैं और उनका इलाज चल रहा है। विभाग का कहना है कि दिसंबर तक पूरा लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा, लेकिन ज़मीनी हालात इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

अस्पताल की हकीकत यह है कि आईसीयू और मेडिकल वार्ड में हर सप्ताह तीन से चार टीबी मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। मरीजों को आइसोलेट नहीं किया जाता, सिर्फ मास्क पहनाकर रखा जाता है। हाल ही में आईसीयू में दो मरीजों को आमने-सामने वाले बेड पर भर्ती किया गया था। वहीं मेडिकल वार्ड में एक मरीज पिछले एक महीने से भर्ती है। यह स्थिति अन्य मरीजों के लिए खतरनाक है।

टीबी वार्ड में 12 बेड हैं और पहले हर बेड पर ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था थी। लेकिन कोरोनाकाल में पाइपलाइन चोरी हो जाने के बाद से यह सुविधा बहाल नहीं की गई। जबकि अस्पताल के पास अपना ऑक्सीजन प्लांट मौजूद है, जो वार्ड से महज 100 मीटर की दूरी पर है। सिर्फ 50 मीटर पाइपलाइन डालने का काम बाकी है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण अब तक यह काम नहीं हुआ।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि गंभीर मरीजों को आईसीयू में रखना मजबूरी है। हालात ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें इंदौर रेफर करना पड़ता है। अधिकारियों का दावा है कि ऑक्सीजन लाइन के लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो टीबी मुक्त अभियान पर असर पड़ सकता है और मरीजों के साथ-साथ अन्य लोगों की सेहत पर भी खतरा मंडराता रहेगा।

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