भारत बनेगा अगले 5 साल में ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा खिलाड़ी, वैश्विक मांग को करेगा पूरा

Saroj kanwar
2 Min Read

India Green Energy: भारत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में तेजी से वैश्विक नेता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली और नवीनीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने बताया कि भारत का लक्ष्य है कि वह दुनिया की ग्रीन हाइड्रोजन की लगभग 10% मांग को पूरा करे। वैश्विक स्तर पर 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन की मांग 10 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक होने की संभावना है।

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 19 कंपनियों को सालाना 8,62,000 टन उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। इसके साथ ही 15 कंपनियों को 3,000 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण क्षमता प्रदान की जा चुकी है। इसका उद्देश्य भारत को न केवल प्रमुख निर्माता, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन के वैश्विक हब और भरोसेमंद निर्यातक के रूप में स्थापित करना है।

मंत्री ने बताया कि 2030 तक देश में लगभग 125 गीगावाट की नवीनीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ सालाना 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन करने का लक्ष्य है। इस मिशन के तहत 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने और 6 लाख लोगों को रोजगार देने का भी लक्ष्य रखा गया है।

ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में वृद्धि से जीवाश्म ईंधन के आयात में सालाना 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी संभव है। साथ ही, इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 50 मिलियन मीट्रिक टन की कमी आएगी।

हाल ही में ग्लोबल ग्रीन और क्लीन हाइड्रोजन मार्केट में कीमतों में कमी और तकनीकी प्रगति के कारण भारत को ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में और भी मजबूत अवसर मिल रहे हैं। आने वाले 5 सालों में भारत न केवल घरेलू मांग पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ग्रीन हाइड्रोजन का बड़ा निर्यातक बन सकता है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *