Sundarkand Path : हिंदू धर्म में हनुमान जी को एक जागृत देवता माना जाता है. आज के समय में बच्चों से लेकर बड़ों तक को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ याद है. कहा जाता है कि रोजाना सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं.
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी का दिन माना जाता है. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती है. आज हम आपको सुंदरकांड पाठ के इस चौपाई के बारे में बता रहे है, जिसे पढ़ने से हर मुसीबत दूर होती है.
चौपाई है ‘जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा, तासु दून कपि रूप देखावा, सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा, अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा’ इस चौपाई में हनुमान जी महाराज और सुरसा के बीच संवाद का वर्णन किया गया है. ये दोहा हनुमान जी की अद्भुत शक्तियों और उनकी बुद्धिमत्ता को दर्शाता है.
– जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा, तासु दून कपि रूप देखावा…. का अर्थ है हनुमान जी जब माता सीता के लिए लंका में जाते है तब वे सुरसा नाम की राक्षस से मिलते है और उन दोनों के बीच में संवाद होता है. सुरसा राक्षस जब अपना मुंह खोलती है तब हनुमान जी महाराज अपना रौद्र रूप धारण करते थे .
– सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा, अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा… का अर्थ है जब सुरसा ने अपना मुंह सो योजन तक बढ़ा लिया तब हनुमान जी ने अपना छोटा सा रूप धारण कर लिया और उसके मुंह में जाकर वापस भी आ गए.