खादी आश्रम में हुबली और ग्वालियर से आए खादी के तिरंगे, बिक्री में कमी

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: जिलेभर में हर घर तिरंगा अभियान के चलते झंडों की मांग बढ़ी है। बाजार में पॉलिस्टर और कॉटन के तिरंगे अधिक बिक रहे हैं, क्योंकि इनकी कीमत कम है। वहीं मऊचुंगी स्थित खादी आश्रम में बिक्री पिछले सालों की तुलना में कम हुई है। यहां मध्य भारत खादी संघ ग्वालियर और खादी संघ हुबली से शुद्ध खादी के झंडे मंगवाए गए हैं, जो 2 बाई 3 के अनुपात में निर्मित हैं।

खादी आश्रम के प्रबंधक वीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि 2×3 फीट के झंडे की कीमत 1100 रुपए और 3×4.6 फीट साइज की कीमत 2100 रुपए है। आश्रम पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। पहले 26 जनवरी या 15 अगस्त पर 150 से 200 झंडों की बिक्री होती थी, लेकिन अब लगभग 50 ही बिकते हैं। इसके पीछे बाजार में कम दाम पर उपलब्ध पॉलिस्टर और कॉटन झंडों की अधिक मांग को कारण माना जा रहा है।

टीकमगढ़ के खादी आश्रम में झंडे बनाए नहीं जाते, बल्कि हुबली और ग्वालियर से मंगाए जाते हैं। 26 जनवरी पर हुबली से आए थे, जबकि 15 अगस्त के लिए ग्वालियर से भेजे गए हैं।

बाजार में थोक विक्रेता गुजरात और दिल्ली से झंडे मंगवाते हैं। कुछ विक्रेता खुद भी तैयार कराते हैं। पॉलिस्टर के झंडे थोक में 30, 40 और 45 रुपए तथा खुदरा में 50, 60 और 70 रुपए में उपलब्ध हैं। कॉटन के झंडों की थोक कीमत 45, 55 और 65 रुपए है, जबकि खुदरा में 80, 90 और 100 रुपए में बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा 15 अगस्त के ध्वजारोहण के लिए 600 से 700 रुपए तक के तिरंगे भी बाजार में मिल रहे हैं।

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