लाखों खर्च कर बने स्वच्छता परिसर बेकार, कई में ताले, टूटी सीटें और गायब गेट

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: जिले की 559 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना से सामुदायिक स्वच्छता परिसर बनाए गए। हर परिसर पर करीब साढ़े तीन लाख रुपए खर्च हुए और निर्माण का जिम्मा पंचायत के सरपंच व सचिव को दिया गया। लेकिन निर्माण के बाद इनकी देखरेख नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि कई परिसर अधूरे, बंद या खराब हालत में हैं।

बर्रोही पंचायत में पंचायत भवन के पीछे बने स्वच्छता परिसर तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। निर्माण के बाद से यह बंद पड़ा है और आसपास घास-खरपतवार उग आए हैं। लंबे समय तक बंद रहने से गेट जाम हो गए और पानी की टंकी व पाइपलाइन भी गायब हो गई।

बगौता पंचायत में बड़े गणेश मंदिर के पास बना स्वच्छता परिसर भी बेकार पड़ा है। यहां का सबमर्सिबल पंप, पाइपलाइन और पानी की व्यवस्था ठप हो चुकी है। गेट टूट गए हैं, सीटों में गंदगी भरी है और टाइल्स भी टूटकर गिर चुके हैं। बिजली कनेक्शन भी काट दिया गया है।

मंकारी पंचायत में जेहर्रा मार्ग पर बना परिसर निर्माण के बाद से ही बंद है। यहां भी खरपतवार फैल गया है और लोग इसके सामने कचरा डालने लगे हैं। गेट पूरी तरह जाम हो गए हैं। यही हाल बैदार और टटम पंचायतों के परिसरों का है।

इन परिसरों में महिलाओं, पुरुषों और दिव्यांगों के लिए अलग-अलग सीटें बनाई गई थीं। साथ ही लघुशंका के लिए अलग टॉयलेट, पानी के लिए बोर और सबमर्सिबल पंप भी लगाए गए थे।

गांव की महिलाएं और युवतियां अब भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। दो साल में ही अधिकतर स्वच्छता परिसर अनुपयोगी हो गए हैं। अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन का कहना है कि बंद पड़े परिसरों की जांच कर उन्हें जल्द चालू कराया जाएगा। सुधार नहीं होने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।

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