UPI की जगह अब होगा बायोमैट्रिक्स का उपयोग, यूजर्स फिंगरप्रिंट और फेस रीडिंग से कर सकेंगे पेमेंट 

Saroj kanwar
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UPI Payment Update: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यूपीआई में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। इससे लोग यूपीआई पेमेंट के लिए पिन डालने की जगह चेहरे की पहचान (फेस स्किॉग्निशन) और फिंगरप्रिंट जैसे बायोमैट्रिक्स का उपयोग कर सकेंगे। इस नए फीचर की अभी समीक्षा की जा रही है। जानकारों का कहना है कि इससे यूपीआई की सुरक्षा और पुख्ता होगी, क्योंकि इनमें पिन चोरी और धोखाधड़ी की ज्यादा गुंजाइश नहीं रहेगी। आगामी 2025 ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में इस फीचर को प्रदर्शित किया जा सकता है। बायोमैट्रिक्स के माध्यम से किए गए

लेनदेन में शुरुआती चरण के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा के लिए मूल्य सीमा तय की जा सकती है। इस बीच फेडरल बैंक ने इसी हफ्ते सुविधा शुरू की है, जिसमें ग्राहक सिर्फ अपने चेहरे की पहचान या अंगुलियों के निशान से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भुगतान कर पाएंगे। इसके लिए ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ेगी।

एक अगस्त से यूपीआई से जुड़ी 10 सेवाओं और सुविधाओं की दैनिक सीमा तय की गई है। इनमें बैलेंस जांचना, ऑटो-पे मैडेट सक्रिय करना, लेनदेन की स्थिति जांचना, यूपीआई से जुड़ी खातों की लिस्ट प्राप्त करना आदि शामिल है। है। हर बैंक को साल में एक बार सिस्टम का ऑडिट भी कराना होगा।

जानिए… कौन से 5 बड़े बदलाव होंगे

ग्राहक एक दिन में 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकेंगे। पीक आवर में इस सुविधा को सीमित किया जाएगा। हर भुगतान के बाद शेष राशि की जानकारी एसएमएस से मिलेगी। इससे बार-बार बैलेंस देखने की जरूरत नहीं होगी। एक दिन में केवल 25 बार ही यह देख पाएंगे कि उनके मोबाइल नंबर से कौन-कौन से बैंक खाते जुड़े हुए हैं। केवल गैर-व्यस्त घंटे में ही सक्रिय होंगे। व्यस्त घंटे सुबह 10 से दोपहर 1 बजे और शाम 5 से रात 9:30 बजे तक माने जाएंगे। ऐप या सेवा का सब्सक्रिप्शन ऑटो-पे मैडेट के जरिए व्यस्त समय में नहीं ले पाएंगे। कोई लेन-देन बीच में अटक जाता है तो बैंक या पीएसपी पर 90 सेकंड तक इंतजार करने के बाद स्थिति देख सकेंगे। दो घंटे में अधिकतम तीन बार ही स्टेटस चेक सकेंगे।

जानिए… ये बदलाव क्यों किए जा रहे

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम का कहना है कि यूपीआई सिस्टम पर बहुत ज्यादा लोड पड़ रहा है, खासकर पीक ऑवर्स (सुबह 10 से दोपहर 1 बजे और शाम 5 से रात 9:30 बजे) में। बार-बार बैलेंस चेक करना या ट्रांजक्शन स्टेटस चेक करने से सिस्टम स्लो हो जाता है। हाल में अप्रैल और मार्च में यूपीआई में दो बड़े आउटेज (सिस्टम डाउन होने की घटनाएं) हुए, जिससे करोड़ों यूजर्स को परेशानी हुई। इन बदलावों से सिस्टम को तेज, भरोसेमंद और बिना रुकावट वाला बनाने की कोशिश है। ऑटो-पे ट्रांजेक्शन अब नॉन-पीक ऑवर्स में प्रोसेस होंगे। ये समय सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच व रात 9:30 बजे के बाद। इससे सिस्टम पर लोड कम होगा और ट्रांजेक्शन तेजी से पूरी होंगे। आम यूजर्स के लिए ज्यादा कुछ नहीं बदलेगा। आपका रोज का पेमेंट, बिल पेमेंट, या मनी ट्रांसफर उसी तरह काम करेगा। बस अगर आप दिन में 50 बार से ज्यादा बैलेंस चेक करते हैं, तो लिमिट क्रॉस होने पर आपको रुकना पड़ेगा। ऑटो-पे पेमेंट्स अपने आप तय समय पर हो जाएंगे।

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