दस्तावेज न होने से आदिवासी को नहीं मिला सरकारी मदद, गांववालों ने मिलकर किया अंतिम संस्कार

Saroj kanwar
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Tikamgarh News: टीकमगढ़ जिले की चंदेरा पंचायत से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक 45 वर्षीय गरीब आदिवासी बीरन की बीमारी से मौत हो गई, लेकिन उसके पास न समग्र आईडी थी, न आधार कार्ड और न ही कोई सरकारी योजना का लाभ मिल पा रहा था। बीरन के पास पहले अंत्योदय राशन कार्ड था, जिसे दो साल पहले पंचायत ने निरस्त कर दिया था। उसने कई बार पंचायत के चक्कर लगाए लेकिन कार्ड दोबारा नहीं बन पाया।

अत्यधिक गरीबी में रहने वाले बीरन के पास इलाज के पैसे नहीं थे और दस्तावेजों की कमी के कारण उसे अंत्येष्टि सहायता भी नहीं मिल सकी। परिवार के पास न तो खुद का मकान है और न ही कोई आय का साधन। उसके मरने के बाद पत्नी और दो बच्चों के सामने अंतिम संस्कार की भी समस्या खड़ी हो गई। अंत में गांववालों ने आपसी सहयोग से लकड़ी, कंडा, कफन और अन्य सामान जुटाया और उसका अंतिम संस्कार कराया।

बीरन का परिवार बाहर रह रहा था, जिससे उनका समग्र आईडी और आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाया। बच्चों का स्कूल में दाखिला भी नहीं हो सका। न आयुष्मान कार्ड है, न पीएम आवास योजना का लाभ मिला। पंचायत सचिव का कहना है कि परिवार उनके पास समग्र आईडी बनवाने नहीं आया, वरना प्रक्रिया पूरी कर दी जाती। वहीं, तहसीलदार ओपी गुप्ता ने बताया कि जैसे ही जानकारी मिली, वे खुद आदिवासी परिवार से मिलने पहुंचे और हर संभव मदद का भरोसा दिया।

यह मामला दिखाता है कि आज भी कई जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं से सिर्फ इसलिए वंचित हैं क्योंकि उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। बीरन की मौत न सिर्फ एक व्यक्ति की तकलीफ है, बल्कि यह सिस्टम की एक खामोश तस्वीर है, जो उन लोगों को नजरअंदाज कर रही है जिन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है।

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