सरकारी पशु अस्पतालों में नहीं मिल रहे डॉक्टर, ग्रामीण झोलाछापों पर निर्भर

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: घुवारा तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पशु चिकित्सालय इन दिनों बदहाल स्थिति में हैं। पशुपालकों को अपने मवेशियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल पा रहा, जिससे वे मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करवा रहे हैं। गलत इलाज के कारण कई पशुओं की मौत भी हो चुकी है।

घुवारा, बमनौरा कलां, रामटौरिया और भगवां गांवों में पशु अस्पताल तो हैं, लेकिन नियमित डॉक्टरों की उपस्थिति नहीं है। घुवारा अस्पताल में डॉक्टर ब्रजेश कुरकु पदस्थ हैं, पर ग्रामीणों का आरोप है कि वे खुद इलाज नहीं करते बल्कि झोलाछाप को भेज देते हैं। साथ ही सरकारी दवाओं की जगह महंगी दवाएं दिलाई जाती हैं।

बमनौरा कलां में पदस्थ डॉक्टर कमला साहू सप्ताह में केवल 1 या 2 दिन अस्पताल आती हैं। रामटौरिया गांव में डॉक्टर उमाकांत तिवारी के पास अस्पताल का प्रभार है, लेकिन यह अस्पताल भी नियमित नहीं खुलता। भगवां गांव में डॉक्टर जयंती चेतवाल तैनात हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार वे सप्ताह में 3-4 दिन ही आती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि एक मामूली बीमारी का इलाज भी 1 से 1.5 हजार रुपये में करवाना पड़ता है। अस्पताल बंद होने के कारण लोगों को वापस लौटना पड़ता है।

पशु चिकित्सकों की लापरवाही को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा कि जांच करवाई जाएगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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