मध्य प्रदेश में किसानों को आय बढ़ाने अंतरवर्तीय फसलों की सलाह, हल्दी बनी पसंदीदा फसल

Saroj kanwar
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MP News: मध्य प्रदेश के किसानों का रुझान अब पारंपरिक फसलों की जगह हल्दी जैसी फसलों की ओर बढ़ रहा है। वजह है  लगातार आंधी, बारिश, वायरस और बीमारियों से होने वाला नुकसान। अभी जिले में करीब ढाई हजार हेक्टेयर भूमि पर हल्दी की खेती की जा रही है।

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने फोफनार क्षेत्र में हल्दी फसलों का निरीक्षण किया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीपकुमार सिंह ने अंबाड़ा गांव में किसान अशोक नत्थू पाटिल के खेत का दौरा किया, जहां तीन एकड़ में हल्दी की खेती की गई थी। किसानों से चर्चा कर उन्हें अंतरवर्तीय फसलें लगाने, जैविक खेती करने और रासायनिक खाद कम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।

किसानों ने बताया कि पहले वे गन्ने की खेती करते थे, लेकिन अब अंबाड़ा, सारोला, उमरदा, बोदरली, फोफनार, डोंगरगांव, बड़झिरी, टिटगांव और दर्यापुर समेत 100 से अधिक गांवों के किसान हल्दी की खेती अपना रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने बताया कि हल्दी की खेती सबसे ज्यादा आंध्र प्रदेश में होती है, लेकिन अब कई अन्य राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में भी की जाती है। हल्दी की खासियत यह है कि इसमें रोग कम लगते हैं और सामान्य बारिश, आंधी-तूफान या जानवरों से भी इसका नुकसान नहीं होता। केवल अत्यधिक बारिश से फंगस लगने की आशंका रहती है।

वैज्ञानिकों ने फसलों की सुरक्षा और आय बढ़ाने के उपाय भी किसानों को बताए और उन्हें जैविक खेती की ओर प्रेरित किया।

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