जैविक खेती में अपनाई अनोखी तरकीब, फलदार पौधे एक-दूसरे को दे रहे पोषण

Saroj kanwar
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Burhanpur News: खंडवा जिले के पुनासा क्षेत्र में एक किसान ने जैविक खेती का अनोखा तरीका अपनाया है। वे अपने खेत में 9-9 फीट की दूरी पर अलग-अलग फलदार पौधे जैसे नींबू, संतरा, आम, सीताफल, कटहल और सुरजना लगा रहे हैं। इन पौधों से गिरने वाली पत्तियां आसपास के पौधों के लिए खाद का काम करती हैं, जिससे सभी पौधे एक-दूसरे के सहयोग से बढ़ते हैं।

खेती में पूरी तरह से जैविक खाद का उपयोग किया जा रहा है। गोबर से खेत में ही कंपोस्ट खाद बनाई जाती है और उसमें गोमूत्र, गुड़, बेसन आदि मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे 10-12 दिन तक रखा जाता है। इसके बाद इसे खेत में इस्तेमाल किया जाता है।

किसान रासायनिक कीटनाशक की बजाय प्राकृतिक कड़वे स्प्रे का उपयोग करते हैं। इसके लिए नीम की पत्ती, धतूरा और सुरजना की फली को उबालकर उसका घोल तैयार करते हैं, जो फसलों को बीमारियों से बचाता है।

इन फलों के बीच वे गेहूं, हल्दी और अदरक की अंतरवर्तीय फसलें भी लेते हैं। संतरे के फूलों की खुशबू से मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं, जिससे परागण बेहतर होता है। चीकू के पेड़ मिट्टी का कटाव रोकते हैं और पानी को संजोते हैं। नींबू के पेड़ कीटों से बचाव करते हैं और सीताफल भूमि की उर्वरता बढ़ाता है।

किसान का कहना है कि यह खेत अब ऑक्सीजन पॉकेट बन गया है। यहां की हरियाली और शुद्ध हवा आसपास के लोगों की सेहत के लिए भी फायदेमंद है।

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