तुलसीदास और प्रेमचंद की जयंती पर व्याख्यान, छात्रों ने बताए साहित्यिक योगदान

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: छत्रसाल महाराजा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययन शाला और शोध केंद्र में गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने दोनों साहित्यकारों के साहित्यिक योगदान और उनकी रचनाओं की समाजिक प्रासंगिकता पर चर्चा की।

मुख्य अतिथि प्रो. उषा शुक्ला ने कहा कि रामचरितमानस एक अद्वितीय ग्रंथ है, जिसमें मनुष्य की कठिनाइयों और उलझनों का समाधान मिलता है। उन्होंने इसे आदर्श जीवन जीने की संहिता बताते हुए कहा कि यदि हम इसे जीवन में उतारें, तो विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

प्रो. बहादुर सिंह परमार ने तुलसीदास और प्रेमचंद को हिंदी साहित्य की महान विभूतियां बताया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास की रचनाएं निराशा में आशा का संचार करती हैं, जबकि प्रेमचंद ने समाज के हर वर्ग की वास्तविकता को अपनी कहानियों में उतारा। उन्होंने प्रेमचंद को लोकजीवन का सच्चा चितेरा बताया।

प्रो. गायत्री वाजपेयी ने कहा कि तुलसीदास ने काव्य को ऊंचाई दी और प्रेमचंद ने कथा साहित्य को नई दिशा। उन्होंने रामचरितमानस के सभी कांडों पर संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए विद्यार्थियों से जीवन में ग्रहण और त्याग का विवेक विकसित करने की बात कही।

छात्रों ने भी अपने विचार साझा किए। छात्र शिवकृष्ण तिवारी ने प्रेमचंद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सोजे वतन जैसी रचना पर अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाया था। शोधार्थी सुरेखा अहिरवार ने मंत्र कहानी को जीवन बदलने वाली बताया, जबकि ऋषिका ने ठाकुर का कुआं के माध्यम से जातिगत भेदभाव पर प्रेमचंद की दृष्टि को सामने रखा।

कार्यक्रम में मानसी चौरसिया, रामप्रकाश और अन्य छात्रों ने तुलसीदास पर भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। सभी ने माना कि दोनों साहित्यकारों का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है और प्रेरणा देने वाला है।

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