Portable Hospital : बिहार के इस शहर में बनेगा दुनिया का पहला र्टेबल अस्पताल, 12 मिनट में बनेगा ऑपरेशन थिएटर

Saroj kanwar
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हाईटेक हेल्थ भीष्म को पहली बार जनवरी में अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रदर्शित किया गया था. पटना एम्स को पोर्टेबल अस्पताल एक यूनिट दी गई है. साथ ही आज यानी 29 जुलाई को पटना एम्स  में पोर्टेबल अस्पताल को प्रदर्शित (डेमो) किया जाएगा.

इस भीष्म क्यूब (Bhishma Cube) में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और मॉनिटरिंग डिवाइस जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. एक क्यूब 72 मिनी क्यूब का बना होता है, जिसमें 200 मरीजों तक का इलाज किया जा सकता है.

साथ ही बन्दूक की गोली लगने के घाव, जलने, सिर, रीढ़ की हड्डी और छाती की चोटों, छोटी सर्जरी, फ्रैक्चर और गंभीर बल्ड लॉस का इलाज किया जा सकता है.  इस पोर्टेबल अस्पताल बहुत हल्के होते है और आप इसे  एयरड्रॉप से लेकर जमीनी परिवहन तक, कहीं भी तेज़ी से बना सकते है.

भीष्म क्यूब का अधिकतम वजन मात्र 20 किलोग्राम होता है. आप अपनी जरूरत के अनुसार इसमें  बिजली और ऑक्सीजन में बनाया जा सकता है. इसे पहाड़ी, ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में तुरंत तैनात किया जा सकता है.

पोर्टेबल अस्पताल की मदद से  प्रतिदिन 10-15 सर्जरी की जा सकती है. अब इस तकनीक का इस्तेमाल भारत में भी किया जाएगा. सरकार ने देश के सभी एम्स अस्पताल को इसकी एक यूनिट दे दी है. 

Patna Portable hospital Bhishma Cube : आज समय अस्पताल होना बहुत जरूरी है. किसी भी आपदा का सामना करने के लिए लोगों को अस्पताल तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है. हाल ही में केंद्र सरकार बिहार के पटना को एक बड़ी सौगात देने जा रही है.

अब पटना में दुनिया का पहला  पोर्टेबल अस्पताल बनाया जा रहा है. इस  पोर्टेबल अस्पताल को सरकार ने  भीष्म क्यूब (Bhishma Cube) का नाम दिया है.

इस पोर्टेबल अस्पताल के बनने से किसी भी आपदा की जगह पर मात्र 20 मिनट में अस्पताल और 12 मिनट में ऑपरेशन थिएटर कहीं भी बनाया जा सकता है. इस पोर्टेबल अस्पताल को  भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा बनाया गया है.

हाईटेक हेल्थ भीष्म को पहली बार जनवरी में अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान प्रदर्शित किया गया था. पटना एम्स को पोर्टेबल अस्पताल एक यूनिट दी गई है. साथ ही आज यानी 29 जुलाई को पटना एम्स  में पोर्टेबल अस्पताल को प्रदर्शित (डेमो) किया जाएगा.

इस भीष्म क्यूब (Bhishma Cube) में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और मॉनिटरिंग डिवाइस जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. एक क्यूब 72 मिनी क्यूब का बना होता है, जिसमें 200 मरीजों तक का इलाज किया जा सकता है.

साथ ही बन्दूक की गोली लगने के घाव, जलने, सिर, रीढ़ की हड्डी और छाती की चोटों, छोटी सर्जरी, फ्रैक्चर और गंभीर बल्ड लॉस का इलाज किया जा सकता है.  इस पोर्टेबल अस्पताल बहुत हल्के होते है और आप इसे  एयरड्रॉप से लेकर जमीनी परिवहन तक, कहीं भी तेज़ी से बना सकते है.

भीष्म क्यूब का अधिकतम वजन मात्र 20 किलोग्राम होता है. आप अपनी जरूरत के अनुसार इसमें  बिजली और ऑक्सीजन में बनाया जा सकता है. इसे पहाड़ी, ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में तुरंत तैनात किया जा सकता है.

पोर्टेबल अस्पताल की मदद से  प्रतिदिन 10-15 सर्जरी की जा सकती है. अब इस तकनीक का इस्तेमाल भारत में भी किया जाएगा. सरकार ने देश के सभी एम्स अस्पताल को इसकी एक यूनिट दे दी है. 

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