होम लोन से बचा सकते हैं 2.5 लाख का टैक्स, टैक्सपेयर्स जान लें ये जरूरी बात Income Tax

Saroj kanwar
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Income Tax: भारत में करदाताओं के लिए आयकर अधिनियम 1961 विभिन्न प्रकार की कर छूट प्रदान करता है। इन छूटों में सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय छूट होम लोन पर मिलने वाली कर छूट है। यह छूट न केवल करदाताओं की कर देनदारी को कम करती है बल्कि घर खरीदने या बनवाने वालों को आर्थिक राहत भी प्रदान करती है। होम लोन की कर छूट के कई प्रावधान हैं जिनकी जानकारी हर करदाता के लिए फायदेमंद है। इन नियमों को समझकर आप अपनी कर देनदारी में काफी कमी ला सकते हैं।

होम लोन ब्याज पर कर छूट के नियम

धारा 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कर छूट सबसे महत्वपूर्ण लाभ है। यदि आपने अपने निवास के लिए घर खरीदा है या बनवाया है तो आप लोन के ब्याज भुगतान पर सालाना अधिकतम 2 लाख रुपये तक की कर छूट का दावा कर सकते हैं। यह छूट केवल उस प्रॉपर्टी के लिए लागू होती है जिसमें आप स्वयं निवास करते हैं। इस छूट का लाभ उठाने के लिए आपको बैंक या वित्तीय संस्था से ब्याज का प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा।

यदि आपकी प्रॉपर्टी किराए पर दी गई है तो स्थिति अलग हो जाती है। किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के मामले में आप पूरे ब्याज की राशि पर कर छूट का दावा कर सकते हैं, यहां 2 लाख रुपये की सीमा लागू नहीं होती। हालांकि, इस स्थिति में आपको किराए की आय को भी अपनी आयकर रिटर्न में दिखाना होगा। यह व्यवस्था निवेशकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।

मूलधन भुगतान पर छूट और अन्य लाभ

धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन की चुकौती पर भी कर छूट मिलती है। यह छूट सालाना 1.5 लाख रुपये की समग्र सीमा में आती है जिसमें अन्य निवेश जैसे पीपीएफ, ईएलएसएस, जीवन बीमा प्रीमियम आदि भी शामिल होते हैं। इसका मतलब यह है कि आपको होम लोन के मूलधन और अन्य सभी 80C निवेशों को मिलाकर कुल 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। यह व्यवस्था आपको अपने निवेश की योजना बनाने में मदद करती है।

प्रॉपर्टी खरीदते समय दिया गया रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी भी धारा 80C के तहत कर छूट के लिए योग्य है। यह राशि भी 1.5 लाख रुपये की समग्र सीमा में शामिल होती है। इसके अलावा, यदि आप पहली बार घर खरीद रहे हैं तो धारा 80EE के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट का भी लाभ उठा सकते हैं। यह छूट धारा 24 की 2 लाख रुपये की छूट के अतिरिक्त मिलती है।

जॉइंट होम लोन और को-ओनरशिप के लाभ

यदि आपने किसी के साथ मिलकर जॉइंट होम लोन लिया है या आप प्रॉपर्टी के सह-स्वामी हैं तो दोनों व्यक्ति अलग-अलग अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में कर छूट का दावा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि पति-पत्नी दोनों जॉइंट बॉरोअर हैं तो दोनों अपने-अपने हिस्से के ब्याज और मूलधन पर छूट ले सकते हैं। इस व्यवस्था से कुल मिलाकर परिवार को दोगुना कर लाभ मिल सकता है।

जॉइंट लोन के मामले में यह आवश्यक है कि दोनों व्यक्ति प्रॉपर्टी के मालिक हों और दोनों ईएमआई का भुगतान कर रहे हों। केवल गारंटर होना पर्याप्त नहीं है, वास्तविक स्वामित्व और भुगतान दोनों आवश्यक हैं। इसके लिए उचित दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट का प्रमाण रखना जरूरी होता है।

निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर विशेष नियम

अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के मामले में कर छूट के नियम थोड़े अलग हैं। निर्माणाधीन प्रॉपर्टी के लिए धारा 24 के तहत ब्याज की छूट तभी मिलती है जब घर का निर्माण पूरा हो जाए और आपको कब्जा मिल जाए। निर्माण के दौरान चुकाए गए ब्याज को प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज कहते हैं जो निर्माण पूरा होने के बाद पांच साल में बांटकर छूट के रूप में लिया जा सकता है।

\होम लोन की कर छूट भारतीय करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण लाभ है जो न केवल घर खरीदने को प्रोत्साहित करती है बल्कि कर भार को भी कम करती है। इन नियमों की सही जानकारी और उचित नियोजन से आप अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। यदि आप होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो इन कर लाभों को ध्यान में रखकर अपनी वित्तीय योजना बनाएं।

Disclaimer

यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। कर नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी कर संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या कर सलाहकार से सलाह लेना आवश्यक है। लेखक या प्रकाशक किसी भी गलत जानकारी या इसके उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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