Guru Purnima 2025: गुरु पूर्णिमा का त्योहार आज, जानें स्नान-दान से लेकर पूजन तक का शुभ मुहूर्त

Saroj kanwar
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Guru Purnima 2025: क्या आपको पता है कि सनातन धर्म के लोगों में गुरु पूर्णिमा को बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार समझा जाता है. इस दिन श्रद्धालु हवन-अनुष्ठान कराकर देवी-देवताओं को भी प्रसन्न करते हैं. आज गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2025) का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है, जिसे लेकर भक्तों में काफी उत्साह बना हुआ है. सुबह से ही धार्मिक स्थलों पर भक्तों की काफी भीड़ लगी हुई है.

मतलब इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2025) के नाम से भी जाना जाता है. गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2025) का इस बार शुभ मुहूर्त कब शुरू हो रहा है, जिसे हर कोई जानना चाहता है. अर्धरात्रि में 1.36 मिनट पर शुरू हो चुकी और तिथि का समापन 11 जुलाई यानी कल अर्धरात्रि 2 बजकर 6 मिनट पर होने वाला है. ऐसे में आप नीचे स्नान और पूजन का शुभ मुहूर्त जान लें.

स्नान दान का शुभ मुहूर्त

हिन्दू धर्म के अनुयायी स्नान दान का शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं. दरअसल, सुबह 4 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 50 मिनट तक था. पूजन का शुभ मुहूर्त- श्रीहरि और माता लक्ष्मी की पूजा का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक रहने वाला है.

गुरु पूर्णिमा पूजन विधि जानें

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima 2025) के दिन सुबह उठते ही पहले घर को अच्छी तरह सा साफ शुद्ध कर लें. फिर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद किसी पवित्र स्थान या पूजा स्थल पर एक साफ सफेद कपड़ा बिछाकर व्यास पीठ तैयार करनी पड़ेगी. उस पर वेदव्यास जी की मूर्ति या फिर कोई तस्वीर स्थापित कर दें.

इसके बाद फिर वेदव्यास जी को चंदन, कुमकुम, फूल, फल और मिठाई आदि भेंट करनी पड़ेगी. इस विशेष दिन पर वेदव्यास जी के साथ-साथ शुक्रदेव और शंकराचार्य जैसे महान गुरुओं का भी स्मरण करना पड़ेगा. इस मौके पर गुरु के साथ-साथ माता-पिता, दादा-दादी व अन्य बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें.

जानिए गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा का आपको महत्व नहीं पता तो जान सकते हैं. इस विशेष दिन पर शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करने का काम करते हैं. यथाशक्ति दक्षिणा, पुष्प, वस्त्र आदि भेंट भी करने का काम होता है. शिष्य इस दिन अपने सारे अवगुणों को गुरु को अर्पित करते हैं. शिष्य अपने जीवन में पाई सफलता का श्रेय गुरु को देता है. गुरु की पूजा उपासना से हर चीज बड़ी सरलता से पा सकते हैं.

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