Jharkhand bagless day :हर शनिवार को बिना बैग ही स्कूल आएंगे बच्चे, जारी हुआ सरकारी आदेश

Saroj kanwar
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Jharkhand bagless day: झारखंड के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में अब हर शनिवार को बच्चों को बस्ता नहीं लाना होगा. इस दिन को ‘बैकलेस डे’ (Bagless Day) के रूप में मनाया जाएगा. इस फैसले के तहत स्कूलों में उस दिन पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि खेलकूद, कला और अन्य गतिविधियों के ज़रिए बच्चों के संपूर्ण विकास पर जोर दिया जाएगा.

देश के अन्य राज्यों की तरह झारखंड भी अपनाएगा बैगलेस डे

गुजरात में पहले से ही हर शनिवार को ‘नो स्कूल बैग डे’ लागू है, और उत्तराखंड में भी हर महीने के अंतिम शनिवार को इसे लागू किया गया है. अब झारखंड भी इसी तर्ज पर अपने कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में यह व्यवस्था शुरू कर रहा है. शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग को इस बाबत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है.

बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर फोकस

शिक्षा मंत्री के अनुसार, बैकलेस डे का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को बढ़ावा देना है. आज के समय में मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस के कारण बच्चे फिजिकल एक्टिविटी से दूर हो गए हैं. स्कूल के बाद वे सीधे मोबाइल में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे खेलकूद और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. ऐसे में यह पहल बच्चों को फिर से खेलों और रचनात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ेगी.

शारीरिक गतिविधि का होगा व्यवस्थित कार्यक्रम

इस योजना को सुनियोजित तरीके से लागू करने के लिए राज्य स्तर से ही एक ‘फिजिकल एक्टीविटी कैलेंडर’ तैयार किया जाएगा. इस कैलेंडर में हर शनिवार को होने वाली गतिविधियों की पूर्व योजना बनाई जाएगी. इन गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं:

  • योग और व्यायाम
  • प्रोजेक्ट वर्क और पेंटिंग
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत
  • इंडोर और आउटडोर खेल
  • इस तरह की गतिविधियां बच्चों को तनावमुक्त और ऊर्जावान बनाने में सहायक होंगी.

पुराने जमाने की पीटी घंटी की होगी वापसी

शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले के जमाने में स्कूलों में आखिरी घंटी पीटी (Physical Training) की होती थी, जिसमें नियमित खेलकूद होते थे. इससे छात्र फिट और अनुशासित रहते थे. अब इस नई पहल के ज़रिए वही परंपरा आधुनिक रूप में दोबारा लाई जा रही है.

वोकेशनल शिक्षा के लिए पहले से होते हैं बैगलेस डे

गौरतलब है कि झारखंड में पहले से ही वोकेशनल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए साल में 10 बैगलेस डे आयोजित किए जाते हैं. इन दिनों में मास्टर ट्रेनर्स छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और कैरियर विकल्पों के बारे में जानकारी देते हैं. अब इस बैगलेस डे की अवधारणा को और विस्तार दिया जा रहा है.छात्रों के लिए नया अनुभव और अभिभावकों के लिए राहत

बैकलेस डे सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि अभिभावकों के लिए भी राहत भरा दिन होगा. बच्चों को भारी भरकम बैग लेकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा और वे एक दिन के लिए खुश होकर खेल-कूद और रचनात्मक गतिविधियों में भाग ले सकेंगे. इससे उनकी सीखने की क्षमता में भी सुधार होगा

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