ITR Filing 2025: जुलाई आते ही सभी टैक्सपेयर्स ने ITR भरना शुरू कर दिया है। सैलरीड टैक्सपेयर्स को फॉर्म 16 दे दिया गया है और उन्होंने रिटर्न भरना शुरू कर दिया है। इस फॉर्म से इनकम और TDS के बारे में पता चलता ही है। साथ ही इससे टैक्स डिडक्शन और रिफंड के लिए भी क्लेम कर सकते हैं।
इधर टैक्स एक्सपर्ट कहते हैं कि ITR भरने से पहले फॉर्म 16 को जरूर चेक कर लें, जिससे कि किसी गलती के कारण टैक्स नोटिस न भेजा जाए और जुर्माना देना पड़ जाए। आइए फॉर्म 16 के बारे में ठीक से जानते हैं।
क्या है फॉर्म 16
फॉर्म 16 नियोक्ता अपने कर्मचारी को देता है, जो कि एक TDS सर्टिफिकेट माना जाता है। इसमें पूरे की साल की सैलरी और काटा गया टैक्स आदि की जानकारी होती है। यह दो तरह से होता है। Part A, जो कि TDS की जानकारी देता है और Part B, जिसमें सैलरी की जानकारी और कटौती आदि की जानकारी होती है।
फॉर्म-16 में ये 6 बातें जरूर जानें-
PAN, सैलरी और TDS की डिटेल को चेक करें (Part A)
सबसे पहले अपने नाम, पैन नंबर, सैलरी और कुल काटे की जानकारी सही से डाली गईं है या नहीं इसके बारे में ठीक से चेक कर लें। वहीं नियोक्ता का Tax Deduction and Collection Account Number (TAN ) भी सही होना चाहिए।
सैलरी और डिडक्शन को चेक करें (Part B)
टैक्स पेयर्स को कौन से अलाउंस दिए गए हैं (जैसे HRA, ट्रैवल अलाउंस) और कौन से सेक्शन के हिसाब से डिडक्शन हुए हैं (जैसे 80C, 80CCD)। आपको इन सब की जानकारी को मिलाना होगा, क्योंकि इसके हिसाब से टैक्स कितना देना होगा यह तय होता है।
अपने कुल टैक्स देनदारी को देखें
डिडक्शन होने के बाद आपको कितना टैक्स देना होगा, इसके बारे में ध्यान से देखना होगा। आपको देखना होगा कि कहीं कोई छूट मिस तो नहीं हो गई है। अगर ध्यान न दिया तो टैक्स बढ़ सकता है।
फॉर्म 26AS से मिलान करें
इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर Form 26AS डाउनलोड कर लें और इसमें डाले गए TDS से फॉर्म-16 को मिला लें। अगर दोनों नहीं मिलते हैं तो रिफंड या टैक्स डिफरेंस में समस्या आ सकती है। इसके बाद ही टैक्स नोटिस आ जाता है।
अगर कुछ गलती हो तो नियोक्ता से बात करें
फॉर्म-16 में कोई गलती होने पर अपने नियोक्ता से बात करें। इसके लिए उन्हें नया TDS रिटर्न फाइल कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो विभाग जुर्माना लगा सकता है।
ITR जल्दीबाजी में न भरें
सारी जानकारी को चेक करने के बाद ITR को भरें। सही जानकारी से रिटर्न भरने से टैक्स का कैलकुलेशन सही होता है और रिफंड भी जल्दी आने की संभावना बढ़ती है।