Haryana New District :हरियाणा में नए जिले बनने की तैयारी पर ब्रेक, जाने क्या है असली कारण

Saroj kanwar
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Haryana New District: हरियाणा में 5 नए जिले बनाने की योजनाओं पर अब फिलहाल तीन साल का ब्रेक लग गया है. प्रदेश की सैनी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब इस पर केंद्र सरकार की जाति जनगणना के परिणाम आने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा. इससे पहले जो प्रक्रिया चल रही थी, वह फिलहाल स्थगित कर दी गई है.

केवल दो जिलों पर हुआ विचार, बाकियों पर फाइलें लंबित


सूत्रों की मानें तो अब तक सरकार ने सिर्फ दो क्षेत्रों – हांसी और गोहाना को लेकर ही गंभीर मंथन किया है. हांसी हिसार जिले का हिस्सा है जबकि गोहाना सोनीपत जिले से जुड़ा है. इन दोनों क्षेत्रों को स्वतंत्र जिला बनाए जाने की दिशा में चर्चा आगे बढ़ी थी, लेकिन जाति जनगणना की प्रक्रिया के कारण यह रुक गई है.

जून में नहीं हुई कैबिनेट सब कमेटी की एक भी बैठक


राज्य सरकार द्वारा गठित की गई कैबिनेट सब कमेटी, जो नए जिलों पर विचार कर रही थी, उसकी जून 2025 में कोई भी बैठक नहीं हो सकी. इसका मुख्य कारण केंद्र की जाति आधारित जनगणना बताई जा रही है. इस जनगणना के नतीजे आने तक कोई ठोस निर्णय लेने से सरकार बच रही है


30 जून को खत्म हो रहा है कमेटी का कार्यकाल


बड़ी बात यह है कि 30 जून 2025 को कैबिनेट सब कमेटी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसे में अब 2027 या 2028 में नई कैबिनेट सब कमेटी बनाई जा सकती है. इसका मतलब यह है कि नए जिलों को लेकर अंतिम निर्णय अब कम से कम तीन साल और टल गया है.

इन 5 क्षेत्रों को बनाया जाना था नया जिला


हरियाणा में जिन इलाकों को नया जिला बनाए जाने पर विचार किया गया था, वे इस प्रकार हैं:

हिसार का हांसी
सिरसा का डबवाली
करनाल का असंध
जींद का सफीदों
सोनीपत का गोहाना
इनमें से हांसी और डबवाली पहले ही पुलिस जिले के रूप में कार्यरत हैं. यानी प्रशासनिक सुविधाओं का कुछ हिस्सा इन इलाकों में पहले से ही मौजूद है, लेकिन उन्हें स्वतंत्र जिला घोषित करने के लिए अब भी प्रक्रिया अधूरी है.


गुरुग्राम के मानेसर को भी जिला बनाने की मांग


इस सूची में एक और नाम गुरुग्राम के मानेसर का भी है. स्थानीय स्तर पर मानेसर को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है. लेकिन अब तक सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे न हो पाने के कारण इस पर कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हो सकी है. यह इलाका औद्योगिक रूप से काफी अहम है, इसलिए इसे जिला बनाने की मांग लगातार तेज हो रही है.

जाति जनगणना बनी सबसे बड़ी अड़चन


केंद्र सरकार द्वारा की जा रही जाति जनगणना फिलहाल हरियाणा सरकार के नए जिलों के फैसले को अस्थायी रूप से प्रभावित कर रही है. जब तक जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक नहीं होते, तब तक क्षेत्रीय आबादी, जातीय संरचना और प्रशासनिक जरूरतों को लेकर कोई ठोस आधार नहीं बन सकेगा. यही कारण है कि कैबिनेट सब कमेटी की गतिविधियां ठप हो गई हैं.

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