8th Pay Commission: देश भर के लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारक पिछले काफी समय से आठवें वेतन आयोग के गठन की मांग कर रहे थे। अब उनके इस लंबे इंतजार का अंत होता दिखाई दे रहा है। मोदी सरकार की तरफ से संकेत मिले हैं कि जल्द ही आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की घोषणा की जा सकती है। यह खबर सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बेहद उत्साहवर्धक है क्योंकि वे काफी समय से अपने वेतन और भत्तों में संशोधन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सातवां वेतन आयोग लागू हुए लगभग नौ साल हो चुके हैं और इस बीच महंगाई काफी बढ़ चुकी है। इसलिए कर्मचारियों का मानना है कि अब नए वेतन आयोग की सख्त जरूरत है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले पर राज्य सरकारों के साथ निरंतर बातचीत कर रही है। विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। लेकिन यह तय है कि सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को समझती है और उनके हित में जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों की बैठक
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय महासंघ यानी जीईएनसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखा। यह बैठक कर्मचारियों और सरकार के बीच एक सकारात्मक संवाद का माध्यम बनी। प्रतिनिधिमंडल ने न केवल आठवें वेतन आयोग की मांग उठाई बल्कि कई अन्य लंबित मुद्दों को भी सामने रखा। मंत्री जी ने धैर्यपूर्वक सभी मांगों को सुना और उन पर विचार करने का आश्वासन दिया।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
बैठक में कर्मचारी संगठनों ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। सबसे पहली और प्रमुख मांग थी कि आठवें वेतन आयोग का गठन जल्द से जल्द किया जाए क्योंकि महंगाई के इस दौर में मौजूदा वेतन संरचना अपर्याप्त हो गई है। दूसरी बड़ी मांग पुरानी पेंशन योजना यानी ओपीएस को फिर से लागू करने की थी। कई कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं कि नई पेंशन योजना की जगह पुरानी पेंशन प्रणाली वापस लाई जाए। तीसरी महत्वपूर्ण मांग कोविड-19 महामारी के दौरान रोकी गई अठारह महीने की महंगाई भत्ते की किस्तों का भुगतान करने की थी। जब महामारी आई थी तब सरकार ने डीए की बढ़ोतरी को रोक दिया था।
चौथी मांग में कहा गया कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस और यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस को समाप्त किया जाए। इसके अलावा कंपैशनेट अपॉइंटमेंट, कैडर रिव्यू और नियमित संयुक्त परामर्शदात्री मशीनरी यानी जेसीएम की बैठकें आयोजित करने की भी मांग की गई। ये सभी मांगें कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और वे चाहते हैं कि सरकार इन पर गंभीरता से विचार करे।
सरकार की प्रतिक्रिया और आश्वासन
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से यह कहा कि आठवें वेतन आयोग का गठन जल्द ही कर दिया जाएगा। यह आश्वासन कर्मचारियों के लिए बहुत राहत भरा था क्योंकि वे काफी समय से इसका इंतजार कर रहे थे। मंत्री जी ने यह भी कहा कि खासतौर पर पेंशन से जुड़े मुद्दों पर तुरंत पेंशन सचिव के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। इससे यह साफ हो गया कि सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विभिन्न राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है। क्योंकि केंद्रीय वेतन आयोग के फैसलों का असर राज्य सरकार के कर्मचारियों पर भी पड़ता है इसलिए सभी पक्षों से परामर्श करना जरूरी है। यह प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसका नतीजा सामने आएगा।
आठवां वेतन आयोग क्यों जरूरी है
भारत में हर दस साल में एक नया वेतन आयोग लागू करने की परंपरा रही है। आखिरी बार सातवां वेतन आयोग साल 2016 में लागू हुआ था जिसने सरकारी कर्मचारियों की मूल सैलरी, विभिन्न भत्तों और पेंशन में बड़ा बदलाव किया था। उस समय कर्मचारियों को काफी राहत मिली थी। लेकिन अब लगभग नौ साल बीत चुके हैं और इस दौरान महंगाई काफी बढ़ गई है। रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बहुत बढ़ गए हैं। पेट्रोल-डीजल से लेकर राशन तक सब महंगा हो गया है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों के लिए अपना घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
अब आठवें वेतन आयोग से उम्मीद की जा रही है कि यह कर्मचारियों की आय में अच्छी-खासी बढ़ोतरी करेगा। इससे महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान खर्चों और जिम्मेदारियों को देखते हुए नया वेतन आयोग बेहद आवश्यक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास सभी क्षेत्रों में खर्च बढ़ गया है। इसलिए वेतन में उचित वृद्धि होनी चाहिए।
फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी की उम्मीद
सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। इस बार कर्मचारी संगठनों की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर कम से कम 3.68 किया जाए। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों के वेतन में तीस से चालीस फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। साथ ही पेंशनभोगियों को भी इससे फायदा होगा क्योंकि पेंशन की गणना भी नए वेतन के आधार पर होगी।
आठवें वेतन आयोग के जल्द गठन की संभावना से सभी सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर है। यह कदम न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारेगा बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाएगा। सरकार का यह फैसला दिखाता है कि वह अपने कर्मचारियों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। आठवें वेतन आयोग से संबंधित जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वेतन आयोग के गठन की सटीक तिथि, फिटमेंट फैक्टर और अन्य विवरण बदल सकते हैं। नवीनतम और आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया सरकारी विभागों की आधिकारिक अधिसूचनाओं का इंतजार करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी जानकारी की सटीकता के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।