Saroj kanwar
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Ratlam Railway Mandal: वेतन निर्धारण आदेश की गलत व्याख्या करके चीफ लोको इंस्पेक्टरों की रिकवरी निकालने वाले रेलवे ने गलती ठीक कर ली है। नए सिरे से पे-फिक्सेशन करके सुधार पत्र भी जारी कर दिए हैं। इससे मंडल के उन 26 चीफ लोको इंस्पेक्टरों को राहत मिल गई है, जो 45 से 50 लाख रुपए की रिकवरी के नोटिस मिलने के बाद से परेशान थे। मंडल रेल प्रबंधक के कार्मिक और लेखा विभाग का यह कारनामा अप्रैल-मई में सामने आया था। इसके बाद से विरोध शुरू हो गया है। इस मामले को वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने मंडल, जोन मुख्यालय से लेकर रेलवे बोर्ड तक उठाया था। इसका असर यह हुआ है कि मुख्यालय के आदेश के बाद मंडल के डिपार्टमेंट को गलती सुधारना पड़ी।

ऐसे रेलवे ने की थी गड़बड़ी

पांचवा वेतनमान लागू होने के दौरान ही शरद गौतम सीएलआई बन गए थे। 1 जनवरी 2006 को छठा वेतनमान लागू हुआ, जिसका लाभ2010 में मिलना शुरू हुआ। 2018 में रेलवे ने उसे वापस ले लिया। 2016 में सातवां वेतनमान लागू हो गया। इसका लाभ 2018 से मिला। जनवरी 2024 तक बढ़ा हुआ वेतन मिलता रहा। फरवरी 2024 में रेलवे ने वेतन पुनर्निधारण को विड्रॉ करके छठवें वेतनमान के हिसाब से कर दिया और रिकवरी निकाल दी थी। कुछ सीएलआई से तो रिकवरी कर भी ली गई थी।

यूनियन पदाधिकारियों का किया स्वागत 

रनिंग लोको सुपरवाइजरों की इस लड़ाई
को वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने पूरे दमखम से लड़ी थी। इसलिए मंगलवार को सुधार पत्र जारी होते ही लाखों की रिकवरी से बचाने पर सेवानिवृत्त रनिंग लोको सुपरवाइजर रामप्रकाश शाक्यवार, बद्रीनारायण, भूपेंद्र लौहार, मनवर सिंह, शरद गौतम, राजकुमार आदि ने वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन के मंडल अध्यक्ष ह्रदेश पांडे, मंडल मंत्री मनोहर सिंह बारठ, शैलेष तिवारी, अशोक तिवारी का स्वागत किया। मुख्य लोको निरीक्षक दिनेश रावत, मुकेश सोनी, मोहम्मद हारुन, गजेंद्र सिंह, रामनिवास यादव, पीके विश्वास, पीवी दिनेश पारीख और नरेंद्र फेकड़े आदि मौजूद रहे।

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