हाई कोर्ट : कर्मचारियों की पत्नी के पक्ष में फैसला,  विधवा को पेंशन का भुगतान 7.5% ब्याज समेत किया जाए

Saroj kanwar
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उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (Uttar Haryana Bijli Vitran Nigam Limited) के

खिलाफ तल्ख टिप्पणी करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा कि कर्मचारी की सेवा के दौरान लगी चोट से हुई दिव्यांगता को अक्षमता बताना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि निंदनीय रवैया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने विभाग को आदेश दिया कि मृतक कर्मचारी की विधवा को पेंशन का पूरा लाभब्याज सहित दिया जाए। याचिकाकर्ता को उनके पति की सेवा से जुड़े सभी पेंशन लाभ और पारिवारिक पेंशन तुरंत बहाल की जाए। साथ ही वर्ष 2018 से अब तक रोकी गई राशि का भुगतान 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए।

मामला वर्ष 1983 का है। याचिकाकर्ता के पति उस समय बिजली निगम में कार्यरत थे। ड्यूटी के दौरान करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हुए व 90% दिव्यांग हो गए। उसी वर्ष उनकी सेवाएं यह कहते हुए समाप्त कर दी गई कि वे अक्षम हो गए हैं। उन्हें कोई पेंशन भी नहीं दी गई। वर्षों बाद पत्नी ने इन वैलिड पेंशन की मांग की। वर्ष 2014 में पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई। लेकिन 2018 में विभाग ने अचानक यह लाभ बंद कर दिया।

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