हल्दी की फसल में अधिक बारिश से नुकसान, बुवाई में इजाफा, संभावित नुकसान के कारण भाव में तेजी

Saroj kanwar
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हल्दी बाजार में हालिया बारिश से खड़ी फसल को हुए संभावित नुकसान के कारण तेजी आई है। दक्षिण भारत के प्रमुख हल्दी उत्पादक राज्यों तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में तेज बारिश ने खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है, जिससे आगामी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस स्थिति का असर इंदौर के सियागंज थोक बाजार पर भी दिख रहा है, जहां मांग स्थिर बनी हुई है और व्यापारी भाव में और मजबूती की संभावना देख रहे हैं।

भारतीय मौसम विभाग ने इस माह में दक्षिण भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है, जिससे फसल की स्थिति को लेकर उत्पादकों की चिंता और गहरी हो गई है। वारंगल और निजामाबाद जैसे प्रमुख केंद्रों से नई आवक की खबरें फिलहाल नहीं आ रही हैं। व्यापारियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में पुराने स्टॉक लगभग समाप्त हो चुके हैं और नई आवक में देरी के चलते बाजार में सप्लाई सीमित बनी हुई है। इसका असर देशभर के थोक बाजारों, खासकर सियागंज जैसे वितरण केंद्रों पर साफ दिख रहा है। इंदौर की सियागंज थोक मंडी में हल्दी की दैनिक आवक सामान्य बनी हुई है।

स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, हल्दी की अच्छी क्वालिटी को खरीदारों की ओर से प्राथमिकता मिल रही है। मंडी में हल्दी का भाव 13000 से 13800 प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। मजबूत क्वालिटी वाली हल्दी पुराने स्टॉक के मुकाबले बेहतर दामों पर बिक रही है। हालांकि, बारिश से नुकसान की खबरों के बीच एक राहत की बात यह है कि इस बार हल्दी की बुआई पिछले साल की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत अधिक हुई है। अब तक करीब 3.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती हो चुकी है, जो पिछले सीजन से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है।

यदि मौसम आगे सामान्य रहा तो उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है, जिससे आने वाले महीनों में बाजार में आपूर्ति सुधर सकती है। हल्दी के निर्यात में अप्रैल-जून 2025 के दौरान 3.12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और कुल शिपमेंट 47949.56 टन रहा है। हालांकि जून माह में निर्यात में गिरावट आई है, जिससे बाजार में थोड़ी चिंता भी देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि वैश्विक बाजार में मांग बनी रही तो कीमतों को सहारा मिल सकता है। फिलहाल बाजार में न तो ज्यादा तेजी है और न ही गिरावट के संकेत।

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