हरियाणा के इन 14 जिलों में पटाखे बनाने, बेचने और फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध, 57% हिस्से में दिवाली, शादी में भी नहीं फोड़ सकेंगे पटाखे

Saroj kanwar
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरियाणा ने एनसीआर में शामिल हरियाणा के 14 जिलों में पटाखे बेचने बनाने और विवाह शादियों में फोड़ने व भंडारण करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

अगर हम इसे क्षेत्रफल की दृष्टि से देखते हैं तो 44212 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले हरियाणा में 25327 वर्ग किलोमीटर यानी हरियाणा के कुल क्षेत्रफल के 57.27% क्षेत्र में अब शादियों, त्योहारो व किसी कार्यक्रम में पटाखे नहीं बजाए जाएंगे।

आज तक हरियाणा में प्रदूषण बढ़ने पर सिर्फ दिवाली के समय में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाता था। इसमें भी ग्रीन पटाखे की छूट मिलती थी। लेकिन अब एनसीआर के जिलों में हर प्रकार के पटाखे पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसे लेकर बोर्ड ने दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। एनसीआर में अधिक प्रदूषण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था कोर्ट की शक्ति के पश्चात यह फैसला लिया गया।

हरियाणा के इन जिलों में नहीं बजाए जाएंगे पटाखे

हरियाणा के महेंद्रगढ़, करनाल, पानीपत, रेवाड़ी, जींद ,चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, रोहतक ,सोनीपत, नुह,पलवल , गुरुग्राम,फरीदाबाद, एनसीआर में है । यहां पर कोर्ट की शक्ति के बाद पटाखे फोड़ने पर पूर्ण  प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इन सभी जिले में शिकायत निवारण तंत्र भी बनाया गया

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरियाणा के सदस्य सचिव प्रदीप कुमार ने बताया कि एनसीआर में शामिल 14 जिलों में शिकायत निवारण तंत्र बनाया गया है। इसके तहत पटाखे को लेकर जारी आदेशों के उल्लंघन पर कोई भी व्यक्ति एसडीएम ,डीसी के पास शिकायत भी कर सकेगा ।शिकायत के लिए ट्विटर हैंडल पर भी प्लेटफार्म बनाया गया है। हर जिले का अलग व्हाट्सएप नंबर और ईमेल आईडी भी दी गई है। जिस पर कोई भी शिकायत कर सकता है।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत पटाखों पर प्रतिबंध

हरियाणा के इंन 14 जिलों में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया गया है ।
धारा 15 के तहत कार्रवाई का प्रावधान किया गया है आदेश निर्देश के उल्लंघन पर संबंधित व्यक्ति को 5 साल तक की सजा और ₹100000 तक का जुर्माना या दोनों भी हो सकते हैं। अगर उल्लंघन जारी रहता है तो प्रत्येक दिन के लिए ₹5000 तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर आदेशों का उल्लंघन कोई कंपनी करती हुई मिलती है तो 1 से 15 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

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