स्वच्छता रैंकिंग में दोहरी तस्वीर: देश में टॉप, राज्य में फिसड्डी

Saroj kanwar
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Chhatarpur News: स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-2025 के नतीजों में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। मध्यप्रदेश के कई शहरों ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन राज्य स्तर की रैंकिंग में वही शहर पिछड़ गए। राष्ट्रीय और राज्य रैंकिंग के मापदंड लगभग समान हैं – जैसे कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी, फीडबैक और सफाई व्यवस्था फिर भी नतीजों में बड़ा अंतर दिखा।

प्रदेश के 383 नगरीय निकायों में से 55 शहरों की रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर रही, लेकिन राज्य रैंकिंग में वे नीचे खिसक गए। इस अंतर पर सवाल उठाते हुए बैतूल निवासी मुकेश कुमार ने पीएमओ में शिकायत भी दर्ज करवाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रैंकिंग में पारदर्शिता नहीं है और भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए।

दिलचस्प बात ये है कि देवास शहर को देश की 903 मीडियम सिटीज में पहला स्थान मिला, लेकिन राज्य में वह तीसरे नंबर पर रहा। इसी तरह खजुराहो और आगरमालवा को राष्ट्रीय स्तर पर क्रमशः 14वीं और 15वीं रैंक मिली, लेकिन राज्य में ये 28वीं और 29वीं पायदान पर रहे। भिंड, नसरुल्लागंज, सोहागपुर, रायसेन जैसे कई शहरों की राज्य रैंकिंग उनकी राष्ट्रीय स्थिति से काफी पीछे रही।

छोटे शहरों में यह अंतर और भी बड़ा है। उदाहरण के तौर पर, हरदा को राष्ट्रीय रैंकिंग में 85वां और राज्य में 121वां स्थान मिला। अलीराजपुर को देश में 100वां और राज्य में 143वां स्थान मिला। इन आंकड़ों से साफ है कि राज्य की रैंकिंग व्यवस्था में कहीं न कहीं असमानता जरूर है।

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