भारत में युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी को देखते हुए, केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया मिशन या राष्ट्रीय कौशल विकास योजना शुरू की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें रोज़गार के योग्य बनाना है, जिससे कुशल कार्यबल का निर्माण हो और बेरोज़गारी कम हो। यह योजना कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित है और इसमें राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन, राष्ट्रीय कौशल नीति, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और कौशल ऋण योजना जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।
युवाओं के लिए बेहतर अवसर
कौशल भारत मिशन उन युवाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो किसी भी कारण से 10वीं या 12वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। ऐसे युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि 3 महीने, 6 महीने और 1 वर्ष तक होती है। पाठ्यक्रम पूरा करने पर, डिजिलॉकर में एक डिजिटल प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाता है, जो पूरे भारत में मान्य होता है। इससे युवा आसानी से नौकरी पा सकते हैं या अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
इस मिशन का उद्देश्य न केवल नए कौशल सिखाना है, बल्कि उन युवाओं को तकनीकी रूप से उन्नत बनाना भी है जिनके पास पहले से ही कौशल हैं, जैसे सिलाई, ड्राइविंग, सफाई सेवाएँ, मैकेनिक, हेयर कटिंग आदि। उन्हें नई तकनीकों, आधुनिक उपकरणों और उद्योग मानकों का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उन्हें न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी रोज़गार के अवसर मिल सकें।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, सरकार रोज़गार मेलों का आयोजन करती है और नौकरी दिलाने में सहायता प्रदान करती है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित युवाओं को तीन साल के लिए ₹2 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा भी मिलता है। यह पहल उन युवाओं को सशक्त बनाने में मदद करती है जिनमें प्रतिभा तो है, लेकिन वे आर्थिक या शैक्षणिक कारणों से अवसरों का लाभ नहीं उठा पाते थे।
पाठ्यक्रम 5 विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित हैं
कौशल भारत मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम 5 प्रमुख श्रेणियों में संचालित किए जाते हैं। इनमें प्रबंधन एवं विकास प्रशिक्षण, जैसे विपणन एवं वित्तीय विश्लेषण, प्रशिक्षकों के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास कार्यक्रम, जैसे महिला सशक्तिकरण योजनाएँ, तकनीकी कौशल पाठ्यक्रम, जैसे फ़ैशन डिज़ाइनिंग, बढ़ईगीरी और इलेक्ट्रोप्लेटिंग, और सूक्ष्म-उद्यम एवं क्लस्टर विकास जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।